सोहराब आलम/मोतिहारी। पूर्वी चंपारण का सुगौली नगर पंचायत इन दिनों विकास कार्यों के बजाय आपसी गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गया है। हाल ही में आयोजित सशक्त कमेटी और बोर्ड की बैठक विकास की चर्चा के बजाय अखाड़े में तब्दील हो गई। बैठक शुरू होते ही वार्ड पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा और जमकर नारेबाजी व हंगामा हुआ।

​कार्यपालक पदाधिकारी पर गंभीर आरोप

वार्ड पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी (EO) धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर भ्रष्टाचार और पक्षपातपूर्ण नीति अपनाने के गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों का कहना है कि नगर में साफ-सफाई और लाइटिंग जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं, लेकिन अधिकारी शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय मनमानी कर रहे हैं। पार्षदों ने वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कार्यपालक पदाधिकारी के रवैये के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त किया।

​पार्षदों और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक

बैठक के दौरान मुख्य पार्षद, उप-मुख्य पार्षद और वार्ड पार्षद एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते दिखे। स्थिति तब और बिगड़ गई जब बहस व्यक्तिगत छींटाकशी तक पहुंच गई। हंगामे की भयावहता को देखते हुए सुगौली थाने की पुलिस को दखल देना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में किसी तरह मामले को शांत कराया गया, हालांकि हंगामे के कारण विकास कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अधर में लटक गए।

​व्यवस्था सुधारने की मांग

आक्रोशित पार्षदों ने स्पष्ट किया कि जब तक भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगती और लाइटिंग व सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। स्थानीय लोगों में भी इस खींचतान को लेकर नाराजगी है, क्योंकि जनप्रतिनिधियों की इस लड़ाई में शहर का विकास पूरी तरह ठप पड़ गया है।