गोविंद पटेल, कुशीनगर. एक ओर पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की लंबी कतारें और बढ़ती भीड़ देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी गंभीर सवाल खड़े कर रही है. खड्डा तहसील क्षेत्र के नगर पंचायत स्थित इंडियन ऑयल के नारायण फिलिंग स्टेशन पर नियमों को दरकिनार कर गैलन, डिब्बों और जरकिन में खुलेआम पेट्रोल-डीजल दिए जाने का मामला सामने आया है. यह स्थिति न सिर्फ सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रही है, बल्कि किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे रही है.
बताया जा रहा है कि पेट्रोल पंप पर कार्यरत कर्मी बिना किसी सुरक्षा मानक का पालन किए खुले कंटेनरों में ईंधन दे रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण गैलन या बोतलों में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्त प्रतिबंध है. इसके उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी है, लेकिन जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लाइन में लगे वाहन स्वामियों ने खुले में तेल दिए जाने पर आपत्ति जताई तो पंप पर तैनात सेल्समैन कथित तौर पर वाहन चालकों से मारपीट पर उतारू हो गए.
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उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब नियमों के खिलाफ पेट्रोल दिया जा रहा है तो विरोध करने वालों को डराने-धमकाने का भी प्रयास किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराई जाए तो नियम विरुद्ध हो रही गतिविधियों की पूरी हकीकत सामने आ सकती है. सवाल यह भी उठ रहा है कि जब खुलेआम सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित पूर्ति विभाग, अग्निशमन विभाग और प्रशासन की निगरानी आखिर कहां है. विशेषज्ञों के अनुसार गैलन और प्लास्टिक के डिब्बों में पेट्रोल देना अत्यंत खतरनाक है. जरा सी चिंगारी या लापरवाही बड़े विस्फोट और आगजनी का कारण बन सकती है।.
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है, या फिर इस गंभीर लापरवाही पर समय रहते कार्रवाई होगी. फिलहाल नारायण फिलिंग स्टेशन पर चल रही यह मनमानी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है. इस सम्बन्ध में जब खड्डा उपजिलाधिकारी से बात किया गया तो उन्होंने जांच कराने की बात कही.
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