चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए Punjab and Haryana High Court ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने आदेशों का पालन न करने और समय पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध न कराने पर सरकार पर 10,000 रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के दौरान अदालत ने हरियाणा सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि राज्य के सरकारी स्कूलों में पेयजल, शौचालय, बिजली और चारदीवारी जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति क्या है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल रहा है या नहीं।
कोर्ट की नाराजगी के मुख्य कारण
- सरकार द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों में जानकारी अधूरी और अस्पष्ट पाई गई
- कई बार समय दिए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग स्कूलों का सही और पूरा डेटा प्रस्तुत नहीं कर सका
- अदालत ने माना कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई है
अदालत का आदेश
न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने सरकार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए इसे एक चेतावनी के रूप में माना है।
साथ ही, सरकार को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया गया है कि शिक्षा विभाग सभी जिलों के सरकारी स्कूलों की सुविधाओं का विस्तृत और स्पष्ट विवरण एक हलफनामे के रूप में पेश करे।
आगे क्या होगा?
यदि अगली सुनवाई तक पूरी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत नहीं की जाती, तो हाईकोर्ट की ओर से और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

