अधिकमास को हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता हैं । इस बार हिंदू नव वर्ष 2083 में 12 की जगह 13 महीने होंगे। इस महीने को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। खास बात यह है कि ये अतिरिक्त महीना हर तीन साल में एक बार आता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, अभी 14 अप्रैल को सूर्य के मीन राशि से निकलते ही खरमास खत्म हुआ है। वहीं अब 17 मई से मलमास शुरू होगा, जो 15 जून तक रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है ।

मांगलिक कार्यों पर ब्रेक

मलमास में कोई भी शुभ कार्य जैसे सगाई, शादी, जनेऊ, मुंडन, गृहप्रवेश आदि कार्य न करे । मलमास में नए काम या व्यापार की शुरुआत न करें। नया घर- कार खरीदने से भी बचना चाहिए और गृहनिर्माण की शुरुआत भी नहीं करनी चाहिए। धर्म-शास्त्रों में मलमास के लिए नियम बताए गए है जिनका पालन जरूरी है।

भगवान विष्णु की उपासना सर्वोत्तम

नारद पुराण के अनुसार, इस महीने में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए कोई भी देवता मलमास का स्वामी बनने को तैयार नहीं था। इससे दुखी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास वैकुंठ गया। तब भगवान ने दया भाव दिखाते हुए खुद इस महीने के स्वामी बने । तभी से इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा और भगवान विष्णु की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है ।

क्यों आता है अधिक मास

हिंदू पंचांग चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते है । सूर्य कैलेंडर में 365 दिन होते है, जबकि चंद्र कैलेंडर में 354 दिन होते है । ऐसे में लगभग 32 महीने और 16 दिन बाद यह अंतर एक महीने के बराबर हो जाता है। जिसे संतुलित करने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है। मलमास में व्रत, तप, दान और पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। दीप दान करने से सुख-समृद्धि मिलती है। माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भागवत कथा का श्रवण और पवित्र नदियों में स्नान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

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