कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 10 वर्ष से अधिक सेवा देने वाले संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारियों का 2016 की नीति के तहत वर्गीकरण किया जाए और उन्हें कुशल, अर्धकुशल वर्ग के अनुसार वेतन व सेवा संबंधी सभी लाभ दिए जाएं।
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कोर्ट ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविदा कर्मियों को आर्थिक न्याय से वंचित करना तर्कहीन है। लंबे समय से निरंतर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को केवल संविदा या आउटसोर्स के नाम पर कम वेतन देकर रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।याचिकाकर्ताओं ने सरकार पर आरोप लगाया था कि समान काम करने वाले कर्मचारियों को भारी वेतन अंतर देकर समानता के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है। कोर्ट ने इस दलील को सही मानते हुए कहा कि 2016 की नीति में कुशल, अर्धकुशल और अकुशल वर्गीकरण का प्रावधान है, जिसका लाभ इन कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि ऐसे सभी कर्मचारियों का वर्गीकरण कर उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतनमान निर्धारित किया जाए और सभी परिणामी लाभ (सेवा शर्तें, भत्ते आदि) दिए जाएं। यह फैसला प्रदेश के हजारों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए राहत भरा है, जो वर्षों से कम वेतन पर काम कर रहे थे। हाईकोर्ट के इस फैसले से अब संविदा कर्मियों को स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाओं की उम्मीद जगी है। सरकार अब इस आदेश का पालन कितनी जल्दी करती है, यह देखना होगा।

