विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर नूंह के खोड़ बसई गांव में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं को पर्यावरण बचाने के साथ-साथ बाल विवाह और नशा मुक्ति जैसे कानूनी विषयों पर जागरूक किया गया।
सोनू वर्मा, नूंह। जिले में पर्यावरण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग के मार्गदर्शन में खोड़ बसई गांव में ‘पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) एवं सचिव नेहा गुप्ता की देखरेख में हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक संसाधनों के गिरते स्तर के प्रति सचेत करना था। कार्यक्रम में करीब 90 महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और जागरूक बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई।
कानून की समझ और कुरीतियों पर प्रहार
जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए सीजेएम नेहा गुप्ता ने सरल भाषा में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से बाल विवाह के खिलाफ कानून और नशा मुक्ति जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। नेहा गुप्ता ने बताया कि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी मानव जीवन का अस्तित्व बचेगा। उनके साथ मंजरी फाउंडेशन के कोऑर्डिनेटर प्रवीण कुमार ने भी अपने विचार रखे। कार्यशाला का मकसद जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को कानून के प्रति सशक्त बनाना था ताकि वे अपने गांव और समाज में एक प्रभावी भूमिका निभा सकें और गलत परंपराओं को रोक सकें।
भविष्य के लिए सकारात्मक पहल
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की शंकाओं का समाधान भी किया गया, जिससे उनमें एक नया आत्मविश्वास देखने को मिला। उपस्थित प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को बेहद उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की मांग की। विशेषज्ञों का मानना है कि जब गांव की महिलाएं जागरूक होती हैं, तो पूरे परिवार और समाज की सोच में बदलाव आता है। नूंह में शुरू हुई यह पहल न केवल पर्यावरण की सुरक्षा करेगी, बल्कि कानूनी रूप से जागरूक एक नए समाज का निर्माण भी करेगी। इस मौके पर पर्यावरण को स्वच्छ रखने और बच्चों को शिक्षित बनाने का संकल्प भी लिया गया।

