पूर्णिया/किशनगंज। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के मद्देनजर बिहार के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। बंगाल की सीमा से सटे बिहार के तीन प्रमुख जिलों किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में प्रशासन ने ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया है। किसी भी प्रकार की घुसपैठ और चुनावी गड़बड़ी को रोकने के लिए करीब 285 किलोमीटर लंबी सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

​दोहरी नागरिकता और सुरक्षा की चुनौती

​इन सीमावर्ती जिलों की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है। प्रशासन के अनुसार, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में रहने वाले एक बड़े वर्ग का नाम पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में भी दर्ज है। रोजी-रोटी और व्यापार के सिलसिले में बिहार में रह रहे ये हजारों लोग आज मतदान के लिए बंगाल का रुख करेंगे। इस आवाजाही के बीच फर्जी वोटरों की एंट्री और असामाजिक तत्वों के प्रवेश को रोकना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

​चप्पे-चप्पे पर पहरा

​शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सीमांचल के इलाकों में सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया है।

  • ​किशनगंज में 10 विशेष ‘मिरर चेकपोस्ट’ बनाए गए हैं।
  • ​कटिहार और पूर्णिया के मुख्य एंट्री पॉइंट्स पर 5-5 चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं।
  • ​पूरे क्षेत्र में 39 स्थानों पर मजिस्ट्रेट (दंडाधिकारी) की तैनाती की गई है, जो पुलिस बल के साथ हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे।

​सघन जांच और जीरो टॉलरेंस

​जिलाधिकारी विशाल राज के निर्देश पर सुबह 6 बजे से ही विशेष तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। चेकपोस्टों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। दोपहिया, चारपहिया वाहनों के साथ-साथ यात्री बसों और ट्रकों की भी गहन तलाशी ली जा रही है। प्रशासन का मुख्य फोकस अवैध नकदी, शराब, हथियारों की तस्करी और फर्जी पहचान पत्रों के दुरुपयोग को रोकने पर है।

​उच्चस्तरीय समीक्षा और नेपाल बॉर्डर पर नजर

​चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने किशनगंज में चार घंटे लंबी मैराथन बैठक की। इस बैठक में न केवल बंगाल सीमा, बल्कि भारत-नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। बैठक में ड्रग्स तस्करी, फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले केंद्रों पर कार्रवाई और ‘नो मेंस लैंड’ से अवैध अतिक्रमण हटाने जैसे गंभीर मुद्दों पर रणनीति तैयार की गई।

​रणनीतिक महत्व के हैं ये जिले

​किशनगंज अकेले ही करीब 2 लाख ऐसे मतदाताओं का केंद्र है, जिनका प्रभाव बंगाल की सीटों पर है। सड़क और रेल मार्ग से सुगम कनेक्टिविटी होने के कारण इन जिलों के जरिए चुनावी माहौल प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। इसी को देखते हुए मतदान से 48 घंटे पहले ही सीमा को ‘फोर्ट्रेस’ (किले) में तब्दील कर दिया गया है।