पटना। शहर के हृदय स्थल महावीर मंदिर से लापता हुई 3 साल की मासूम अंशु का सुराग लगाने में पुलिस अब तक नाकाम रही है। व्यवस्था से निराश परिजन अब खुद सड़कों पर उतरकर अपनी बेटी की तलाश कर रहे हैं। शहर की दीवारों पर लगे पंपलेट पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

​मंदिर परिसर से अचानक गायब हुई मासूम

​घटना 4 अप्रैल की शाम की है, जब कमला नेहरू नगर की रहने वाली मासूम अंशु अपनी मां नीतू कुमारी के साथ प्रसिद्ध महावीर मंदिर में दर्शन के लिए गई थी। शाम करीब 6:00 बजे मंदिर परिसर की भीड़-भाड़ के बीच अंशु अचानक लापता हो गई। काफी खोजबीन के बाद जब वह नहीं मिली, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

​पुलिस ने मदद के बजाय मांगे ‘सबूत’

​हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद जब परिजन जीआरपी थाने पहुंचे, तो उन्हें कोतवाली थाना भेज दिया गया। बच्ची की नानी मीना देवी का आरोप है कि कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाने के बजाय उनसे बच्ची की गुमशुदगी के सबूत मांगे। साक्ष्य न होने की बात कहकर उन्हें थाने से लौटा दिया गया। यह सिलसिला करीब 15 दिनों तक चलता रहा। अंततः 18 अप्रैल को एक महिला ट्रैफिक कांस्टेबल की मध्यस्थता के बाद पुलिस ने औपचारिक आवेदन स्वीकार किया।

​ह्यूमन ट्रैफिकिंग की आशंका

​स्थानीय वार्ड पार्षद श्वेता रंजन ने इस मामले में पुलिस की घोर लापरवाही पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि बच्ची किसी ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ (मानव तस्करी) गिरोह का शिकार हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सीसीटीवी फुटेज खंगालने का काम पुलिस को करना चाहिए था, उसके लिए पीड़ित परिवार को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

​’किसी भाई-बहन को मिले तो पहुंचा दें’

​प्रशासन से मायूस होकर अब परिजन खुद ही ‘जासूस’ और ‘प्रचारक’ बन गए हैं। वे पटना की गलियों और चौराहों पर पंपलेट चिपका रहे हैं, जिस पर मासूम अंशु की तस्वीर के साथ एक भावुक अपील लिखी है: बच्ची 4 अप्रैल से लापता है। किसी भाई-बहन को मिले तो पटना जंक्शन महावीर मंदिर पर पहुंचाने का कष्ट करें।
​फिलहाल, 19 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। वरीय अधिकारियों के संज्ञान लेने का इंतजार किया जा रहा है ताकि इस मासूम को सुरक्षित उसके घर पहुंचाया जा सके।