अमेरिका-ईरान युद्ध का असर भारत पर दिखाई देने लगा है. देश में सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद होटलों में खाना महंगा हो गया है. कई उत्पादों के भी दाम बढ़ गए हैं. इस बीच खबर आई की देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होने वाली है, इंतजार बस चुनाव का है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया कि चुनाव के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम में 28 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिस पर अब सरकार ने स्पष्टीकरण जारी किया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऐसी खबरों को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है. मंत्रालय ने ऐसे दावों को सिरे से नकार दिया है.
सरकार ने क्या कहा ?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ट्वीट किया कि कुछ खबरें आ रही हैं जिनमें पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है. इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के विचाराधीन ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. इस तरह की खबरें नागरिकों के बीच डर और घबराहट पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं और ये शरारतपूर्ण तथा भ्रामक हैं. वास्तव में, भारत एकमात्र ऐसा देश है जहाँ पिछले 4 वर्षों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. भारत सरकार और तेल PSUs ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली भारी बढ़ोतरी से भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं.
25-28 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी का दावा
Kotak Institutional Equities की रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया कि मौजूदा हालात में 25-28 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया कि कच्चे तेल की कीमतें करीब $120 प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे तेल कंपनियों और सरकार पर भारी वित्तीय दबाव पड़ रहा है. सरकारी तेल कंपनियां हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं. यह स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती. फिलहाल सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती और विंडफॉल टैक्स जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन ये केवल अस्थायी राहत हैं, स्थायी समाधान नहीं है. रिपोर्ट के इन सभी दावों को सरकार ने नकार दिया है.
कच्चे तेल के दाम पर युद्ध का असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के पीछे वैश्विक कारण भी अहम हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और खासतौर पर Strait of Hormuz में बाधाएं सप्लाई पर असर डाल रही हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं. भारत पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है. हालांकि कच्चे तेल के आयात में 13-15% की कमी आई है, लेकिन महंगे दामों की वजह से कुल आयात बिल रोजाना $190-210 मिलियन तक बढ़ गया है. इससे साफ है कि कीमतों में बढ़ोतरी का असर मात्रा से ज्यादा भारी पड़ रहा है. मगर कोटक की इस रिपोर्ट के जरिए चली सभी खबरों का सरकार ने खंडन किया है और उन्हें भ्रामक बताया है.
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