पटना। भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में जारी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आर्थिक अपराध इकाई (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। किशनगंज के पूर्व नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन की मुश्किलें अब काफी बढ़ गई हैं। आय से अधिक संपत्ति (DA Case) के मामले में EOW ने उन्हें नोटिस भेजकर पटना स्थित मुख्यालय में पूछताछ के लिए तलब किया है। उन्हें आगामी मंगलवार को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

​16 साल की सेवा और 50 करोड़ का साम्राज्य

​सूत्रों के मुताबिक, साल 2009 में बिहार पुलिस में दारोगा के रूप में बहाल हुए अभिषेक रंजन ने महज 16 वर्षों के सेवा काल में आय के ज्ञात स्रोतों से लगभग 118 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। जांच एजेंसी का अनुमान है कि उनकी चल-अचल संपत्ति का कुल मूल्य 50 करोड़ रुपये के करीब है। पद का दुरुपयोग कर जुटाई गई इस अवैध कमाई की परतें खोलने के लिए अब उनसे आमने-सामने पूछताछ की जाएगी।

​पांच ठिकानों पर छापेमारी में मिले चौंकाने वाले सुराग

​बीते 14 अप्रैल को EOW की पांच अलग-अलग टीमों ने अभिषेक रंजन के पटना, छपरा, सिलीगुड़ी, मुजफ्फरपुर और किशनगंज स्थित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। इस छापेमारी में विलासिता के ऐसे साधन मिले जिसने अधिकारियों को भी चौंका दिया:

  • ​आलीशान बंगले: पटना में स्विमिंग पूल वाला भव्य मकान और पैतृक आवास का लग्जरी नवीनीकरण।
  • ​जमीन और निवेश: सिलीगुड़ी में फ्लैट, दार्जिलिंग रोड पर जमीन और मुजफ्फरपुर के कांटी क्षेत्र समेत दिल्ली-NCR में निवेश के दस्तावेज।
  • ​वाहनों का काफिला: जांच में 7 ट्रकों समेत कई अन्य लग्जरी वाहनों के मालिक होने का प्रमाण मिला है।

​निलंबित SDPO और माफियाओं से जुड़ा है कनेक्शन

​अभिषेक रंजन का नाम तब चर्चा में आया जब किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ (SDPO) गौतम कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि अभिषेक रंजन, गौतम कुमार के बेहद करीबी सहयोगी रहे हैं। इसके अलावा, प्रारंभिक पड़ताल में उनके तार बालू माफिया, शराब तस्कर और एंट्री माफिया से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। आशंका है कि इन माफियाओं के साथ साठगांठ कर ही करोड़ों की बेनामी संपत्ति खड़ी की गई।

​विभागीय गाज और वर्तमान स्थिति

​भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद, पूर्णिया प्रक्षेत्र के आईजी विवेकानंद ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभिषेक रंजन को पहले लाइन हाजिर और फिर निलंबित कर दिया था। वर्तमान में दर्ज डीए केस के आधार पर EOW यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट में और कितने रसूखदार लोग शामिल हैं।
​मंगलवार को होने वाली पूछताछ को बेहद अहम माना जा रहा है। यदि अभिषेक रंजन अपनी संपत्ति के कानूनी स्रोतों का प्रमाण नहीं दे पाते हैं, तो उनकी गिरफ्तारी और संपत्तियों की जब्ती जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।