आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। सरकार बस्तर में विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है। सड़क, पुल और सुविधाओं की तस्वीर पेश की जा रही है, लेकिन दरभा ब्लॉक के चितापुर की सच्चाई इन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। यहां 9 महीने पहले बारिश में टूटी पुलिया आज तक नहीं बन पाई है। हालात ऐसे हैं कि तीन गांवों के ग्रामीण, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग रोज जान जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर हैं। प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं।
चितापुर पंचायत की यह पुलिया कभी गांवों को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता थी, लेकिन अब यही पुलिया बदहाली की पहचान बन चुकी है। पुलिया के उस पार पंचायत भवन, स्कूल, बैंक, स्वास्थ्य केंद्र और राशन दुकान जैसी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। यानी तीन गांवों के लोगों के लिए यह रास्ता सिर्फ सड़क नहीं बल्कि जिंदगी की डोर है, लेकिन पुलिया टूटने के बाद ग्रामीणों को नाले के बीच से गुजरना पड़ रहा है। लोगों ने खुद पत्थर, मिट्टी और रेत की बोरियां डालकर अस्थायी रास्ता बनाया है, ताकि किसी तरह आवागमन जारी रह सके।


हर दिन जान हथेली पर सफर
इस रास्ते से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे रोज अपनी जान जोखिम में डालकर इसी रास्ते को पार करते हैं। दोपहिया वाहन फिसलते हैं, लोग गिरते हैं… लेकिन मजबूरी है। मजबूरन गिरते पड़ते आवागमन करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में हालात और ज्यादा डरावने हो जाते हैं। पानी बढ़ते ही पूरा रास्ता डूब जाता है और गांवों का संपर्क कट जाता है। मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाते, राशन नहीं आ पाता और पूरा इलाका थम जाता है।

सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे परेशान
इस टूटी पुलिया का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। छोटे-छोटे बच्चे रोज बांस और लकड़ी के सहारे बने जुगाड़ू रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं। कई बच्चे फिसलकर नाले में गिर चुके हैं। किताबें भीग गईं कपड़े खराब हुए, लेकिन पढ़ाई के लिए खतरा उठाना उनकी मजबूरी बन गया है। बच्चों के परिवारों में हर दिन डर बना रहता है कि स्कूल गए बच्चे सुरक्षित लौटेंगे या नहीं।
9 महीने से सिर्फ आश्वासन
करीब 9 महीने पहले मानसून की तेज बारिश में यह पुलिया टूट गई थी। तब से अब तक ना मरम्मत हुई ना नया निर्माण शुरू हुआ ना कोई स्थायी इंतजाम किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच से लेकर विधायक, सांसद और कलेक्टर तक शिकायत की जा चुकी है, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। कई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, तस्वीरें खिंचवाईं, भरोसा दिया, लेकिन पुलिया आज भी टूटी पड़ी है।
बस्तर में विकास की बातें जरूर हो रही हैं, लेकिन चितापुर की टूटी पुलिया हकीकत की तस्वीर दिखा रही है। यहां तीन गांवों के लोग रोज मौत के रास्ते से गुजर रहे हैं। बच्चे जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे हैं और जिम्मेदार खामोश हैं। अब सवाल यही है कि आखिर कब तक ग्रामीण अपनी जिंदगी दांव पर लगाते रहेंगे और कब प्रशासन जागेगा?
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