दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। जिले के पिपरिया सिविल अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ओटी अटेंडर बरसाती लाल ने चिकित्सा जगत की मर्यादा तार-तार करते हुए एक महिला की ब्रेस्ट सर्जरी कर डाली। न ओपीडी पर्ची, न डॉक्टर की सलाह बस पैसों की हवस में अटेंडर ‘सर्जन’ बन गया। ​जब आशा कार्यकर्ता ने महिला की हालत देखी, तब जाकर इस ‘मुन्नाभाई’ का काला चिट्ठा खुला। पता चला कि यह अटेंडर पहले भी पेट की सर्जरी जैसा दुस्साहस कर चुका है।

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​मामला ग्राम सिंगानामा की एक 22 वर्षीय प्रसूता का है। महिला के ब्रेस्ट में गठान थी, जिसे निकालने के लिए न तो किसी डॉक्टर की सलाह ली गई और न ही कोई पर्ची बनी। डॉक्टर साहब बने बरसाती लाल ने अकेले ही ऑपरेशन थियेटर में मोर्चा संभाला और महिला की सर्जरी कर डाली। हद तो तब हो गई जब उसने ड्रेसिंग के नाम पर महिला को 8 बार बुलाया और हर बार 1000-1500 रुपये की फीस वसूली। गरीब महिला से करीब 10 हजार रुपये ऐंठ लिए गए। 

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​इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब आशा कार्यकर्ता प्रमिला महिला के घर विजिट पर पहुंचीं। वहां का मंजर देख वह दंग रह गईं। पूछताछ हुई तो सारा सच उगल पड़ा। आनन-फानन में मामला बीएमओ तक पहुंचा और तब जाकर अस्पताल प्रशासन की नींद टूटी।

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जांच में पता चला कि बरसाती लाल का यह पहला कारनामा नहीं है। फरवरी 2026 में भी उसने बिना सर्जन डॉ. सौम्य रघुवंशी को बताए एक मरीज की पेट की सर्जरी कर दी थी। अब बीएमओ ने कार्रवाई की बात की है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर अस्पताल की नाक के नीचे यह मुन्नाभाई इतने दिनों से सर्जन कैसे बना रहा? क्या इसमें कोई और भी हिस्सा ले रहा था या फिर अस्पताल प्रशासन पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सोया था? 

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