कुंदन कुमार/पटना। बिहार की सियासत में बदलाव और सम्राट चौधरी के सत्ता की कमान संभालते ही प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। पटना के राजपुर इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नगर निगम की टीम ने कई अपार्टमेंट और मकानों पर लाल निशान लगाते हुए उन्हें अवैध घोषित कर दिया। घरों की दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है— “COMPLETE BUILDING TO BE DEMOLISHED”।
शहनाइयों के बीच टूटने का डर
इस प्रशासनिक कार्रवाई ने एक परिवार की रातों की नींद उड़ा दी है। जिस घर में कुछ दिनों बाद बेटी की डोली उठने वाली थी, वहां अब बुलडोजर की गूंज सुनाई दे रही है। घर की महिलाएं हाथों में बेटी की शादी का कार्ड लेकर बदहवास खड़ी हैं। एक तरफ घर में मांगलिक गीतों की तैयारी थी, तो दूसरी तरफ घर के ढह जाने का डर। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है; उनका सवाल है कि बेटी की शादी इस माहौल में कैसे होगी और हम सड़क पर कहां जाएंगे?
30 दिनों का अल्टीमेटम और कड़े निर्देश
पटना नगर निगम द्वारा जारी नोटिस बेहद सख्त है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि 30 दिनों के भीतर पूरे निर्माण को खुद ही तोड़ लिया जाए। इतना ही नहीं, प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगले 4 से 5 दिनों के भीतर बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। बुनियादी सुविधाएं छिन जाने के डर से स्थानीय निवासी गहरे तनाव में हैं।
नक्शा बनाम सरकारी जमीन का विवाद
प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि इन मकानों का निर्माण बिना किसी अधिकृत नक्शे के किया गया है और जिस जमीन पर ये इमारतें खड़ी हैं, वह सरकारी भूमि है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि जमीन उनकी अपनी है और वे वर्षों से यहां रह रहे हैं। मालिकाना हक और अवैध निर्माण की इस कानूनी जंग के बीच अब बुलडोजर का साया मंडरा रहा है।
सरकार से न्याय की गुहार
प्रभावित परिवारों की महिलाएं अब मुख्यमंत्री और नई सरकार से आशियाना बचाने की गुहार लगा रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई सरकार मानवीय आधार पर बेटी की शादी को देखते हुए कोई राहत देती है, या फिर ‘अवैध निर्माण’ के खिलाफ प्रशासन का सख्त डंडा चलेगा।
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