पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों अवैध अतिक्रमण पर चल रहा ‘बुलडोजर एक्शन’ और ‘शराबबंदी कानून’ चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इन संवेदनशील मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और संतुलित राय रखी है। उन्होंने सरकार की कार्रवाई का समर्थन तो किया, लेकिन साथ ही मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखने की नसीहत भी दी।
अतिक्रमण के खिलाफ सख्त
बिहार सरकार द्वारा अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए चलाए जा रहे बुलडोजर अभियान पर चिराग पासवान ने कहा कि कानून का राज स्थापित करने के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है। जो मकान सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बने हैं, उन पर कार्रवाई राज्य सरकार का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस प्रक्रिया में किसी निर्दोष या हकदार परिवार के साथ अन्याय न हो।
पुनर्वास के बिना आशियाना उजाड़ना गलत
चिराग पासवान ने जोर देते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से गरीबों की आवाज रही है। उन्होंने मांग की कि यदि किसी गरीब परिवार का घर हटाया जा रहा है, तो सरकार को पहले उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। बिना पुनर्वास के किसी का आशियाना उजाड़ना उचित नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि कानून के पालन के साथ-साथ गरीबों के अधिकारों की रक्षा करना भी प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।
शराबबंदी कानून: मंशा पर भरोसा, क्रियान्वयन पर सवाल
बिहार के शराबबंदी कानून पर बोलते हुए चिराग ने कहा कि नीति के पीछे की सोच गलत नहीं है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के तरीके में गंभीर कमियां हैं। जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कानून को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
तस्करी रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों पर सख्ती की मांग
चिराग ने सुझाव दिया कि शराबबंदी को सफल बनाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ानी होगी। दूसरे राज्यों से हो रही तस्करी और अवैध शराब के नेटवर्क को तोड़े बिना इस कानून का पूर्ण लाभ मिलना मुश्किल है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह कानून की समीक्षा करे और उन खामियों को दूर करे जिनसे आम जनता को परेशानी हो रही है।
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