महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि शशि थरूर ने निजी बातचीत में यह “स्वीकार” किया कि कांग्रेस महिला विरोधी रही है। रिजिजू ने यह भी कहा कि यह बातचीत संसद सत्र के बाद दोनों नेताओं के बीच हुई थी, जिसका वह अब हवाला दे रहे हैं।
थरूर को लेकर किया बड़ा दावा
न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद संसद भवन में उनकी मुलाकात कांग्रेस सांसद शशि थरूर से हुई थी। रिजिजू के अनुसार, इस बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को महिला विरोधी माना जा सकता है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें कोई भी महिला विरोधी नहीं कहेगा। इस पर रिजिजू ने जवाब दिया, “मैं मानता हूं कि कोई आपको महिला विरोधी नहीं कहेगा, लेकिन आपकी पार्टी का रुख महिला विरोधी है।” रिजिजू ने आगे दावा किया कि इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि थरूर ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस के रुख को महिला विरोधी माना।
रिजिजू ने थरूर को लेकर क्या कहा ?
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, “उनका आशय यह था कि भले ही कांग्रेस को महिला-विरोधी माना जाए, लेकिन महिलाएं शशि थरूर को व्यक्तिगत रूप से महिला-विरोधी नहीं मानेंगी। इसका अर्थ यह निकलता है कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस के महिला-विरोधी होने को स्वीकार किया। वहीं, मैंने भी यह माना कि वे व्यक्तिगत तौर पर महिला-विरोधी नहीं हो सकते, लेकिन उनकी पार्टी की छवि महिला-विरोधी है।”
महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस पर बरसे रिजिजू
बता दें कि, इससे पहले महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधनों के खिलाफ विपक्ष के मतदान करने को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा था और महिला विरोधी होने का आरोप लगाया. लोकसभा में बिल पारित न होने पर रिजिजू ने कहा था कि ‘कांग्रेस महिलाओं को अधिकारों से वंचित रखने का जश्न मना रही है, देश की महिलाएं कांग्रेस को करारा सबक सिखाएंगी. उसे देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा.’
विपक्ष ने किया विरोध
संविधान के 131वें संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके साथ ही, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने सीटों के विस्तार का प्रावधान किया गया था।
हालाँकि, विपक्ष के विरोध और इसके खिलाफ मतदान के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। विपक्ष ने सदन में सीटों की संख्या बढ़ाए बिना महिला आरक्षण कानून लागू करने की मांग की थी. विपक्ष का तर्क था कि प्रस्तावित परिसीमन बीजेपी को फायदा देने के लिए किया जा रहा है. विपक्षी दलों ने यह भी तर्क दिया कि ऐसा कदम दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव करेगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के अधिक प्रभावी उपाय लागू किए हैं.
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