रायपुर। छत्तीसगढ़ आज विकास के अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है। यह चमत्कार एक सशक्त और संवेदनशील सरकार की ही उपलब्धि हो सकती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में उद्योग और श्रम विभाग के बीच अभूतपूर्व समन्वय स्थापित हुआ है। यह समन्वय औद्योगिक प्रगति को गति देने के साथ ही साथ श्रमिकों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व का नया अध्याय भी जोड़ रहा है।

आमतौर पर औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण को हमेशा दो अलग कोण से देखा जाता रहा है। छत्तीसगढ़ ने इस परंपरागत सोच को बदलते हुए ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है जिसमें उद्योग और श्रम विभाग कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। इस मॉडल का मूल मंत्र ही है “विकास और कल्याण साथ-साथ”। स्पष्ट रूप से राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव का मानना है कि “राज्य का विकास तभी सार्थक हो सकता है जब उद्योगों की प्रगति के साथ-साथ श्रमिकों का जीवन स्तर भी ऊंचा उठे।” उनकी इस बात को बल देते हुए राज्य में उद्योगों के विस्तार के साथ श्रमिकों के अधिकारों और सुविधाओं को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।
स्थानीय युवाओं के लिए खुले रोजगार के नए अवसर
युवा वर्ग किसी भी राज्य और राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी ताक़त होते हैं। युवाओं की इस शक्ति को पहचानते हुए छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने कौशल विकास को प्राथमिकता दी है। श्रम विभाग,औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहा हैं जिससे स्थानीय युवाओं को उनके ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मुख्य औद्योगिक केंद्रों जैसे रायपुर, दुर्ग, कोरबा और बिलासपुर में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। इससे राज्य की बेरोजगारी और पलायन दोनो ही समस्याओं में अंकुश लगाया जा रहा है। स्थानीय युवा उच्च वेतन वाली नौकरियों तक पहुंच रहे हैं जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
श्रमिक कल्याण: विकास की आधारशिला
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय श्रमिकों को केवल उत्पादन का माध्यम नहीं मानते बल्कि उन्हें वे समाज की रीढ़ कहते हैं।उनके इसी दृष्टिकोण के चलते श्रमिक कल्याण योजनाओं में उल्लेखनीय विस्तार किया गया है।

श्रमिकों के लिए दुर्घटना में त्वरित आर्थिक सहयोग, आवास सहायता और शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना जैसी योजनाएँ श्रमिकों के जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बना रही हैं। छत्तीसगढ़ की साय सरकार के द्वारा मात्र 5 रुपये में श्रमिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उनके बच्चों को उत्कृष्ट विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना मानवता और संवेदनाओं से भरा एक क्रांतिकारी कदम है। उनकी यह पहल वर्तमान के साथ ही साथ भावी पीढ़ी के भविष्य की नींव को मजबूत कर रही है। प्रतिभा को सर्वोपरि मानते हुए छत्तीसगढ़ की साय सरकार मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि दे रही हैं जिनमे श्रमिक वर्ग के भी बहुत से छात्रों का चयन होता है।
आर्थिक सशक्तिकरण और पारदर्शिता, दोनों चल रहे साथ-साथ
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली से पिछले दो वर्षों से श्रमिकों के खातों में करोड़ों रुपये सीधे हस्तांतरित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार का उद्यम पारदर्शिता और प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बना हुआ है। DBT से यह सुनिश्चित होता है कि योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है। प्रतिदिन हजारों श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलना, इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार की योजनाएं धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं।

छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास- सोपान से शिखर की ओर
नई औद्योगिक नीति 2024-2030 के तहत राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं जिससे छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लगातार मजबूत हो रही है । सैकड़ों नए उद्योगों की स्थापना, करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्ताव और हजारों युवाओं को रोजगार मिलना इस नीति की सफलता का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर की स्थापना, आईटी और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में निवेश और स्टार्टअप नीति का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ को आधुनिक तकनीकी युग में अव्वल बना रहा है। आर्थिक बदलाव सामाजिक संरचना को भी नई दिशा देता है। अब छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों के अलावा तकनीकी और औद्योगिक विकास के लिए भी पहचाना जा रहा है।
प्रशासनिक सुधार से तैयार हो रहा निवेशकों के लिए आसान माहौल
छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए ई-निविदा प्रणाली और सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया है। इससे निवेशकों को उद्योग स्थापित करने में आसानी हो रही है और उनका भरोसा राज्य सरकार पर बढ़ा है। इन सुधारों का परिणाम अब सामने आ रहा है छत्तीसगढ़ अब निवेशकों के लिए एक ऐसा आकर्षक गंतव्य बन गया है जहां उद्योग स्थापित करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और पारदर्शी हो गया है।
सामाजिक समावेशन बन रहा विकास का असली आधार
विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने के लिए छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और दूरस्थ क्षेत्रों में औद्योगिक विकास जैसी योजनाओं को पूरी गति के साथ आरम्भ किया है। राज्य सरकार आर्थिक विकास के साथ ही साथ सामाजिक समावेशन पर भी समान ध्यान दे रही है। इसके चलते छत्तीसगढ़ का विकास मॉडल संतुलित और समावेशी बन गया है। इस पूरी प्रक्रिया का मार्गदर्शन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता से संभव हो सका है।
रजत जयंती वर्ष के साथ छत्तीसगढ़ नई उपलब्धियों की ओर
अपने 25वें स्थापना वर्ष यानी रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुके छत्तीसगढ़ ने जिस तरह से उद्योग और श्रम के समन्वय को प्राथमिकता दी है वह निश्चित ही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। छत्तीसगढ़ की वर्तमान विकास यात्रा यह साबित करती है कि यदि शासन में नीति स्पष्ट, दृष्टिकोण संवेदनशील और नेतृत्व मजबूत हो तो विकास लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में श्रम और उद्योग विभाग का समन्वित प्रयास राज्य को सामाजिक स्थिरता और आर्थिक समृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है। यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। छत्तीसगढ़ एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहा है जहां उद्योग प्रगति का प्रतीक होंगे और श्रमिक सम्मान और सुरक्षित जीवन के स्वामी। यही सच्चे अर्थों में यही “समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़” की पहचान होगी।
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