पटना। दिल्ली में बिहार के एक युवक की हत्या ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि केवल ‘बिहारी’ होने के कारण किसी की जान लेना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​दिल्ली हत्याकांड पर सख्त प्रतिक्रिया

​चिराग पासवान ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर से सीधी बात की है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी के सांसद घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे। इसके पश्चात, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वे स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा करेंगे। पासवान ने जोर देकर कहा कि “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के विजन के तहत हर बिहारी की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।

​प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष मंत्रालय की वकालत

​बिहार के युवाओं के पलायन और अन्य राज्यों में उनके साथ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए चिराग ने एक बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रवासी मजदूरों के लिए एक अलग मंत्रालय बनाने की मांग दोहराई। उनका तर्क है कि एक समर्पित मंत्रालय होने से देशभर में कार्यरत बिहारी श्रमिकों का एक सटीक डेटाबेस तैयार होगा, जिससे संकट के समय उन्हें तत्काल कानूनी और आर्थिक सहायता प्रदान करना सुगम हो जाएगा।

​राष्ट्रगान की अनिवार्यता का स्वागत

​बिहार के स्कूलों में राष्ट्रगान अनिवार्य करने के राज्य सरकार के निर्णय पर चिराग ने प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक ‘सकारात्मक कदम’ बताया। उनके अनुसार, स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ के सामूहिक गान से बच्चों में देशभक्ति के संस्कार प्रबल होंगे।

​तेजस्वी यादव पर पलटवार

​विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा भाजपा शासित राज्यों को बिहारियों के लिए ‘अभिशाप’ बताने पर चिराग ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो आज सवाल उठा रहे हैं, वास्तव में बिहार की बदहाली और पलायन के लिए उन्हीं की पिछली नीतियां जिम्मेदार हैं।
​बिहार में आगामी मंत्रिमंडल विस्तार पर उन्होंने संकेत दिया कि विभिन्न राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अगले पांच साल बिहार के लिए ‘स्वर्णिम काल’ होंगे, जहां विकास की गति राज्य की सूरत बदल देगी।