दिल्ली में परिवहन व्यवस्था से जुड़ा एक अहम निर्णय लेते हुए परिवहन विभाग ने कंपनियों को एक साथ कई ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने वाला अपना पुराना सर्कुलर वापस ले लिया है। इस फैसले को छोटे चालकों और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह (Dr. Pankaj Kumar Singh) ने कहा कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में बड़े कॉर्पोरेट एकाधिकार को रोकना और व्यक्तिगत चालकों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ई-रिक्शा का मालिकाना हक कुछ कंपनियों तक सीमित न रहकर आम लोगों और जरूरतमंद चालकों के पास रहेगा।
2022 वाला सर्कुलर वापस
ई-रिक्शा और ई-कार्ट से जुड़ी नीति में अहम बदलाव करते हुए 21 अप्रैल 2022 को जारी अपने पुराने सर्कुलर को वापस ले लिया है। विभाग ने आधिकारिक नोट में स्पष्ट किया कि यह निर्णय चालकों और उनके वाहनों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। वापस लिए गए सर्कुलर के तहत कंपनियों और फर्मों को अपने नाम पर बड़ी संख्या में ई-कार्ट और ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी गई थी। हालांकि यह अनुमति केवल लिथियम-आयन बैटरी वाले मॉडलों तक सीमित थी, फिर भी इससे कॉर्पोरेट स्तर पर बड़े पैमाने पर स्वामित्व की स्थिति बनने लगी थी।
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने पहले ही संकेत दिया था कि सरकार परिवहन क्षेत्र में किसी भी तरह के एकाधिकार को बढ़ावा नहीं देना चाहती। अब इस सर्कुलर को वापस लेने के साथ यह साफ हो गया है कि सरकार व्यक्तिगत चालकों को प्राथमिकता देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
सरकार का कहना है कि संशोधित नीति का उद्देश्य राजधानी के अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाना है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, नए निर्णय से यह सुनिश्चित किया गया है कि ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन के फायदे सीमित कंपनियों या फर्मों तक न सिमटें, बल्कि आम लोगों के बीच व्यापक रूप से वितरित हों। इससे परिवहन क्षेत्र में संतुलन बनेगा और छोटे स्तर पर काम करने वाले चालकों को अधिक अवसर मिलेंगे।
ड्राइवरों के लिए आत्मनिर्भर रोजगार की पहल
जारी बयान में कहा गया है कि दिल्ली सरकार उन चालकों की आजीविका को मजबूत करना है, जो शहर की ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ की रीढ़ माने जाते हैं। सरकार के अनुसार, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब ई-रिक्शा चालक बड़ी संख्या में लोगों को उनके अंतिम गंतव्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन चालकों को अधिक आर्थिक सुरक्षा और स्वतंत्रता मिल सके।
इस निर्णय से चालकों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए बिना बड़े ऑपरेटरों के अधीन कर्मचारी बने, सम्मानपूर्वक आजीविका कमाने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से ई-रिक्शा सेक्टर में मालिक-चालक मॉडल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे चालक खुद अपने वाहन के स्वामी बन सकेंगे और उनकी आय पर सीधा नियंत्रण रहेगा। इससे बिचौलियों और बड़ी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी।
इस पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए परिवहन मंत्री ने कहा, “हमारा यह निर्णय समान आजीविका के अवसरों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करता है। वाहन को व्यक्तिगत चालक के हाथों में वापस देकर हम स्वरोजगार को सशक्त बना रहे हैं। साथ ही, हम दिल्ली की ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ की रीढ़ की रक्षा कर रहे हैं।”
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