Women Reservation UP Special Session. उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण को लेकर विशेष सत्र का आयोजन किया गया. इस दौरान सदन में पक्ष और विपक्ष में जबरदस्त बहसबाजी हुई. मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि ‘आज हम महिला आरक्षण के विषय पर चर्चा क्यों कर रहे हैं? इसको हमारे सदन के माध्यम से पूरे प्रदेश की जनता को जानने का अवसर मिले और विपक्ष ने इस अधिनियम को रोकने के लिए क्या अड़ंगें लगाएं है? उसको भी सामने आना चाहिए. हमारे देश ने महिलाओं के गौरव को देखा है. कांग्रेस और उनके सहयोगियों की सरकार 1947 से लेकर लगातार इस अधिनियम को कोई न कोई अड़ंगा लगाकर लागू नहीं होने देना चाहती थी.’
बीजेपी विधायक विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि ‘महिलाओं की भागीदारी अब राजनीति में भी आने वाली है और एक टकटकी भरी नजरों से देख रही थी. लेकिन वो 17 तारीख का दिन जो काला दिन हुआ. आधी आबादी के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोकने का. वो आधी आबादी देखी है. 33 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में हमारे विपक्ष के साथी. जब लोकसभा में बिल आया था तो ये सब लोग अपने वोट की ताकत से आधी आबादी को राजनैतिक भागीदारी न मिले उसको रोकने का काम किया था’.
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कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष को शर्म करना चाहिए. आप लोगों को अपने कर्मों की वजह से वहां (विपक्ष में) बैठना पड़ रहा है. महिलाओं ने तलवार उठाया था. आरक्षण भीख नहीं है महिलाओं का अधिकार है. उनको और अधिकार देना पड़ेगा. जब मुगल आए थे तो तलवार लेकर आए थे और आप जैसे लोगों ने सलवार पहन लिया था. लेकिन महिलाओं ने लड़ा था मुगलों से.
बहनों के अधिकार के लिए इतना इंतजार स्वाकार्य नहीं- असीम अरुण
मंत्री असीम अरुण ने कहा कि ”नारी शक्ति वंदन अधिनियम साल 2023 में पास हुआ. जमीनी स्थिति क्या है? केवल 15 % महिलाएं इस समय संसद की सीटों पर हैं. विधानसभाओं में कहीं पर कम कहीं पर ज्यादा, 15 % का आर्टिफिशियल कैप बना हुआ है. जिसे हम लोगों को मिलकर दूर करना है. निर्णय हुआ लेकिन क्या हम इसको लागू करने के लिए 11 साल इंतजार करेंगे. क्या 2034 तक इंतजार करना होगा. मुझे ये स्वीकार नहीं है कि मैं अपनी बहनों के अधिकार के लिए इतना ज्यादा इंतजार करूं”.
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विधायक मनोज पांडेय ने कहा कि ”उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा राज्य है, सबसे बड़ी आबादी का राज्य है और हम ये कह सकते हैं कि दुनिया के बहुत सारे देश वो उत्तर प्रदेश से छोटे भी हैं. आज जब आधी आबादी की ये बहस यहां पर हो रही है. इसके लिए सदन को बधाई. इस बात में कोई दोराई नहीं है कि नारी शक्ति को बढ़ाने के लिए और मातृ शक्ति को ताकत देने के लिए जो प्रस्ताव आया. उससे देश की आधी आबादी गांव में बैठकर. घरों में बैठकर टीवी में मोबाइल में. टकटकी लगाकर देख रही थी, कम से कम आजादी के बाद ऐसा अवसर आया, जब देश के प्रधानमंत्री ने आधी आबादी के लिए एक ऐसा बिल लाने का काम किया”.
सपा विधायक आर के वर्मा ने कहा कि ”बात नारी वंदन की हो रही है. बात नारी की गरिमा की हो रही है. लेकिन बीजेपी का लंबा इतिहास रहा है नारी गरिमा को मर्दन करने का . पूरे उत्तर प्रदेश में ही नहीं आप भारत के कोने-कोने में देखिए किस तरीके से महिलाओं का मान मर्दन करने का काम किया जा रहा”. सपा विधायक रागिनी सोनकर ने कहा कि BJP संसद में नेहरू को कोसती है. विधानसभा में नेताजी को कोसते हैं. प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है. महिलाएं पंचायत का नेतृत्व कर रही थीं. उसी पंचायत चुनाव को BJP नहीं करा रही है. यूपी विधानसभा में 50% आरक्षण दीजिए, BJP मौजूदा सीटों पर 50% आरक्षण दे. कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने कहा कि ”इतिहास ही सबसे बड़ा गवाह होता है सच्चाई का, बहुत से आरोप लगातार सुनते आ रहे है. क्या किया कांग्रेस पार्टी ने? ये नहीं किया. ये करना चाहिए था. पर मैं कुछ तथ्य सामने रखूंगीं, मैं बात करूंगी आजादी के पहले की’.
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