Bastar News Update : बस्तर. बस्तर की सड़कों पर अब लापरवाही नहीं चलेगी, क्योंकि ट्रैफिक नियमों की निगरानी हाईटेक हो चुकी है. परिवहन विभाग ने इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए नियम तोड़ने वालों पर सीधी कार्रवाई शुरू कर दी है. अब केवल हेलमेट या सीट बेल्ट ही नहीं, बल्कि वाहन के पूरे दस्तावेज भी कैमरे की नजर में हैं. अगर इंश्योरेंस खत्म है, तो सड़क पर चलते-चलते ही ई-चालान आपके मोबाइल पर पहुंच जाएगा. नेशनल हाईवे-63 के धनपुंजी, बकावंड और लोहंडीगुड़ा समेत 7 स्थानों पर ये सिस्टम सक्रिय है. दोपहिया पर 1000, कार पर 3000 और भारी वाहनों पर 5000 तक जुर्माना तय है. इस व्यवस्था से चोरी के वाहनों की पहचान भी आसान हो जाएगी. यातायात पुलिस ने शहर के 14 पॉइंट्स पर और कैमरे लगाने का प्रस्ताव भेजा है. जल्द ही रेड सिग्नल तोड़ने, नो-पार्किंग और गलत दिशा में चलने वालों पर ऑटोमैटिक कार्रवाई होगी. विभाग का दावा है कि इससे सड़क सुरक्षा और राजस्व दोनों में बढ़ोतरी होगी. हालांकि सवाल ये भी है कि क्या लोग अब सच में नियमों का पालन करेंगे? या फिर जुर्माने के डर से ही सही, सड़क पर अनुशासन लौटेगा?  

जर्जर पुल से पार हो रहे भारी वाहनों

जगदलपुर. जगदलपुर में विकास के नाम पर एक बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. इंद्रावती नदी पर नया पुल बन रहा है, लेकिन पुराने जर्जर पुल से ही भारी वाहनों को गुजरने दिया जा रहा है. स्थिति ये है कि जहां दोपहिया मुश्किल से निकलती थी, वहां अब चारपहिया भी चल रही हैं. रात के समय बेरिकेट हटाकर वाहनों को पार कराया जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है. पुल में रेलिंग नहीं है और अस्थायी सुरक्षा इंतजाम भी टूट चुके हैं. सुबह-शाम मजदूर और व्यापारियों की भारी आवाजाही से ट्रैफिक दबाव और बढ़ जाता है. स्थानीय पार्षद जाहिद हुसैन पहले ही प्रशासन को चेतावनी दे चुके हैं. इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. लोगों का कहना है कि प्रशासन हादसे के इंतजार में बैठा है. अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो बड़ा नुकसान हो सकता है. सवाल ये है कि विकास के साथ सुरक्षा क्यों नहीं? और कब जागेगा जिम्मेदार तंत्र?

पुराना सपना, अब खंडहर

बस्तर. सस्ती और पाइपलाइन गैस का सपना 28 साल बाद भी अधूरा है. जगदलपुर के पास आड़ावाल में बना गैस प्रोजेक्ट आज खंडहर में तब्दील हो चुका है. एक समय था जब यहां से पूरे संभाग में ईंधन सप्लाई की योजना थी. 10 हजार घरों तक पाइपलाइन गैस पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया. आज यह परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है. मशीनें गायब, कमरे उजाड़ और दस्तावेज बिखरे पड़े हैं. लोगों की उम्मीदें भी इसी कबाड़ में दफन हो गईं. अब सरकार नई गैस नीति की बात कर रही है. दावा है कि स्वच्छ ऊर्जा और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे. लेकिन सवाल वही क्या पुराने वादों का हिसाब होगा? या फिर ये भी एक नया सपना बनकर रह जाएगा?

अवैध शराब और जुआ, पुलिस पर सवाल

बस्तर. बड़ांजी थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. यहां अवैध शराब और खुड़खुड़ी का खेल खुलेआम चल रहा है. साप्ताहिक बाजारों में देशी-विदेशी शराब की बिक्री आम बात बन चुकी है. हैरानी की बात ये है कि प्रतिबंधित जुआ भी बेखौफ संचालित हो रहा है. सूत्रों का दावा है कि कारोबारियों का थाने से “सेटिंग” है. इसी वजह से कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है. स्थानीय लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही. यह इलाका चित्रकोट जाने वाले पर्यटकों का रास्ता भी है. बाहर से आने वाले लोग इस खुले खेल को देखकर हैरान हैं. पहले भी ऐसे मामले सामने आए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में ये कारोबार फल-फूल रहा है? और कब होगी इस पर सख्त कार्रवाई?

आज भी बेगारी प्रथा

नारायणपुर. बस्तर में इतिहास की काली छाया आज भी खत्म नहीं हुई है. बेगारी प्रथा, जो अंग्रेजों के समय शुरू हुई, अब भी कुछ इलाकों में जारी है. पहले कोड़ों के डर से, अब कर्ज और मजबूरी के कारण लोग मुफ्त में काम कर रहे हैं. इतिहासकार बताते हैं कि 1853 के बाद अंग्रेजों की नीतियों ने इसे बढ़ावा दिया. आदिवासियों से खेती, ढुलाई और घरेलू काम जबरन कराए जाते थे. आज भी कई ग्रामीण कर्ज चुकाने तक बंधुआ मजदूरी करते हैं. नारायणपुर के माड़ क्षेत्र में जमानत के बदले बेगारी के मामले सामने आए हैं. जमीन के कागज न होने से लोग कानूनी जाल में फंसे रहते हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी ये शोषण जारी है. भूमकाल आंदोलन भी इसी अन्याय के खिलाफ हुआ था. लेकिन आज भी हालात पूरी तरह नहीं बदले हैं. सवाल ये है कि आजादी के इतने साल बाद भी ये प्रथा क्यों जिंदा है?

सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले बस ऑपरेटरों पर सख्ती

बस्तर. यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ अब महंगा पड़ रहा है. परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटरों के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाया. इस दौरान 17 मामलों में कार्रवाई कर 23,500 रुपये जुर्माना वसूला गया. कई ट्रेवल्स की बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई. ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा और किराया सूची तक की जांच की गई. अधिकारियों ने साफ कहा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. कार्रवाई से बस संचालकों में हड़कंप मच गया है. विभाग ने संकेत दिए हैं कि ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे. यात्रियों को सुरक्षित सफर देना अब प्राथमिकता है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सख्ती स्थायी होगी? या फिर कुछ दिन बाद सब पहले जैसा हो जाएगा?

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तेंदूपत्ता पर टकराव और ESMA  

बीजापुर. बीजापुर में तेंदूपत्ता सीजन शुरू होते ही विवाद गहराता दिख रहा है. 1 मई से तुड़ाई शुरू करने के आदेश के साथ सरकार ने ESMA लागू कर दिया है. यानी अब कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे. पहले संघ ने 8 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया था. सरकार को करोड़ों के नुकसान की आशंका थी. इसी के चलते सख्त कदम उठाया गया. दूसरी ओर ग्रामीण तुड़ाई की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा. वन विभाग से सीधे डीएफओ से बातचीत की जिद भी सामने आई. स्थिति अब टकराव की ओर बढ़ती दिख रही है. एक तरफ सरकारी सख्ती, दूसरी तरफ आदिवासियों की आजीविका. अब देखना होगा कि समाधान कैसे निकलता है?

तोतों की तस्करी और हमला

जगदलपुर. संजय मार्केट में वन्यजीव तस्करी का बड़ा खुलासा हुआ है. यहां तोते के बच्चों की खुलेआम बिक्री की जा रही थी. वन विभाग की टीम ने दबिश देकर 15 तोते बरामद किए. इनमें संरक्षित प्रजातियां भी शामिल हैं. लेकिन कार्रवाई के दौरान स्थिति बिगड़ गई. आरोपियों ने भीड़ जुटाकर टीम पर हमला कर दिया. इस घटना में अधिकारी को निशाना बनाया गया. पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. एक आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है. टीम अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है. सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. सवाल ये है कि शहर के बीचोंबीच ये अवैध कारोबार कब से चल रहा था.