अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर आज सासाराम की सड़कों पर मजदूरों का जबरदस्त आक्रोश और एकजुटता देखने को मिली। ग्रामीण मजदूर यूनियन के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रमिक शामिल हुए। इस प्रदर्शन को इंकलाबी निर्माण कामगार यूनियन का भी भरपूर समर्थन मिला, जिससे आंदोलन ने और भी व्यापक रूप ले लिया।
बाल विकास मैदान में हुंकार
कार्यक्रम की शुरुआत शहर के ऐतिहासिक बाल विकास मैदान में एक विशाल सभा के साथ हुई। सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न मजदूर नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की श्रमिक नीतियों पर तीखा प्रहार किया। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में महंगाई जिस तेजी से बढ़ रही है, उस तुलना में मजदूरों की आय स्थिर है, जिससे उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।
प्रमुख मांगें और प्रदर्शन
सभा के पश्चात मजदूरों ने एक विशाल रैली निकाली, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए गुजरी। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर बुलंद आवाज में नारेबाजी की। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- श्रम कानून: सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानूनों को अविलंब रद्द किया जाए।
- न्यूनतम मजदूरी: मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी को बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिदिन तय किया जाए।
- काम के घंटे: कार्यस्थल पर काम के घंटों का स्पष्ट निर्धारण हो ताकि शोषण पर रोक लगे।
- सामाजिक सुरक्षा: असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित किए जाएं।
यूनियन के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी जायज मांगों पर विचार नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र होगा। रैली के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम देखे गए।
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