रायपुर। रायपुर की अदालत ने इलाज के बहाने धर्मांतरित करने वाली महिला को धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत प्रदेश में पहली सजा सुनाई है. दोषी महिला ने चमत्कारी तेल और गर्म पानी से महिला का इलाज किया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी.

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कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद आरोपी ईश्वरी साहू को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास के साथ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत 1 वर्ष और टोनही प्रताड़ना के मामले में 1 वर्ष की सजा सुनाई है.

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जानकारी के अनुसार, योगिता सोनवानी नाम की महिला को बीमारी के इलाज के लिए आरोपी ईश्वरी साहू के पास ले जाया गया था. महिला खुद को चमत्कारी शक्तियों से युक्त बताकर इलाज करने का दावा करती थी. उसने योगिता का इलाज कथित तौर पर चमत्कारी तेल और गर्म पानी से किया. इस दौरान महिला की हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई.

अंधविश्वास फैलाकर करती थी गुमराह

घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. जांच में सामने आया कि आरोपी अंधविश्वास फैलाकर लोगों को गुमराह करती थी, और झाड़-फूंक व कथित चमत्कारी उपचार के जरिए इलाज करती थी. इसी दौरान लापरवाही और अमानवीय तरीके से किए गए इलाज के कारण योगिता सोनवानी की जान चली गई.

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