ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान किए गए हमलों में बचे बमों में विस्फोट हो जाने पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजी) के 14 सदस्य मारे गए. ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के करीबी माने जाने वाली वेबसाइट नूरन्यूज के मुताबिक, यह विस्फोट तेहरान के उत्तर-पश्चिम में स्थित जंजन शहर के पास हुआ. सात अप्रैल को युद्धविराम शुरू होने के बाद से यह आईआरजी के सदस्यों की सबसे बड़ी संख्या में मौत का मामला है. खबर में कहा गया है कि युद्ध के दौरान गोला-बारूद समेत क्लस्टर बम गिराए गए थे.

ईरान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक बड़ा हादसा हुआ है. ऑर्डनेंस क्लियरेंस यानी अनफटे गोला-बारूद को हटाने के मिशन के दौरान हुए विस्फोट में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के 14 जवानों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने की बातचीत अभी चल ही रही है कि एक साथ कई बड़ी घटनाएं हो गई हैं. पहली बात यह कि ईरान में एक बड़ा हादसा हुआ जिसमें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानि IRGC के 14 जवान मारे गए. दूसरी बात यह कि IRGC ने अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया. और तीसरी बात यह कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया कि ईरान का नया प्रस्ताव उन्हें पसंद नहीं आया. यानी शांति की राह अभी भी बहुत मुश्किल है. 

ईरान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में जंजान नाम का एक प्रांत है. वहां IRGC की एक टीम एक खास काम कर रही थी. यह काम था जमीन में दबे या पड़े हुए न फटे हुए बमों और गोले-बारूद को हटाना. इसे ‘ऑर्डनेंस क्लियरेंस’ कहते हैं. इस दौरान अचानक एक न फटा हुआ बम फट गया. इस धमाके में IRGC के 14 जवान मारे गए और 2 घायल हो गए.

IRGC ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज की खाड़ी की नाकेबंदी इसी बाधा डालने की बड़ी योजना के तहत की है. इसका असली मकसद चीन, रूस और यूरोप को रोकना है. लेकिन IRGC का दावा है कि यह योजना 20 दिनों में ही नाकाम हो गई है. और अब ईरान उन देशों का केंद्र बन गया है जो अमेरिका की इस ‘बाधा डालने’ की नीति के खिलाफ हैं.

वहीं, व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने एक नया प्रस्ताव भेजा है लेकिन वो इससे खुश नहीं हैं. उनके शब्द थे कि ‘वो समझौता करना चाहते हैं लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं, देखते हैं क्या होता है.’ राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने कुछ कदम जरूर उठाए हैं लेकिन उन्हें यकीन नहीं है कि ईरान आखिर में किसी समझौते तक पहुंच पाएगा.

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