शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश की पुलिस की जांच पर सीआईडी ने सवाल उठाए हैं। CID ने कहा कि 7 साल से कम मामलों में पुलिस अपराधों की विवेचना नहीं करती है। जिसके बाद फरियादी परिवारवाद लेकर कोर्ट पहुंच रहा है। वहीं उदाहरण के तौर पर सीआईडी ने केस स्टडी भी बताया है।

सीआईडी (क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) ने मध्य प्रदेश की पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। सीआईडी का कहना है कि 7 वर्ष से कम मामलों में पुलिस अपराधों की विवेचना नहीं करती है। जिसके बाद फरियादी परिवारवाद लेकर कोर्ट पहुंच रहा है। पुलिस मुख्यालय की अपराध अनुसंधान विभाग ने कहा कि प्रीवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग 2002 के धन संशोधन की अपराध का 7 वर्ष का है। इसमें अपराध पुलिस की तरफ से जांच नहीं होती है।

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उदाहरण के तौर पर सीआईडी ने केस स्टडी बताएं। घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, मध्य प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, खनिज एवं खान अधिनियम के तहत आने वाले केस में एफआईआर नहीं होती है। वहीं पुलिस मुख्यालय ने सभी जिले की पुलिस अधीक्षक और पुलिस कमिश्नर भोपाल और इंदौर को पत्र लिखा है।

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