केरल में विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना जारी है। रुझानों के अनुसार केरल में 10 साल बाद एक बार फिर कांग्रेस गठबंधन की सरकार वापसी कर रही है। बंगाल के सभी 140 सीटों के रुझान सामने आ गए हैं। इसमें लेफ्ट गठबंधन LDF को 39 सीटों पर आगे दिखाया जा रहा है। वहीं कांग्रेस गठबंधन की UDF 95 सीटों आगे दिख रही है। सबसे बड़ी बात जो इस चुनाव में निकल कर आई है वो है बीजेपी द्वारा 3 सीटों पर आगे रहना। वहीँ अन्य भी 3 सीटों पर आगे दिखाई दे रही है। इन रुझानों को नतीजों में बदलने में अब ज्यादा वक्त नहीं है।
इसी के साथ ही आजादी के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि देश के किसी भी राज्य में अब लेफ्ट की सरकार नहीं रहेगी। केरल आखिरी राज्य था, जहां लेफ्ट की सरकार बची हुई थी, हालांकि अब केरल भी लेफ्ट के हाथ से छूटता नजर आ रहा है। बता दें इससे पहले भी त्रिपुरा और बंगाल से लेफ्ट साफ हो चुका है।
आखिरी राज्य भी हाथ से निकला
बता दें कि केरल के अलावा पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी लेफ्ट की सरकार पहले रह चुकी है, लेकिन इन दोनों जगहों पर भी लेफ्ट का सफाया हो चुका है। साल 2011 में पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार एक बार बाहर हुई तो फिर दोबारा वापसी नहीं कर सकी। वहीं त्रिपुरा में भी साल 2018 में लेफ्ट की सरकार को जनता ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब केरल में भी लेफ्ट की सरकार गिरती हुई नजर आ रही है। केरल में यूडीएफ की जीत के साथ ही पूरे देश से लेफ्ट का सफाया हो जाएगा। इसका मतलब है कि देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं बचेगी।
पिनरई के 12 मंत्री पीछे
वहीं दूसरी तरफ केरल में जारी मतगणना के बीच यहां कम से कम 12 मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में पीछे हैं। मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन खुद अपनी मौजूदा सीट धर्मदम में पिछड़ रहे हैं, जिसे उनका गढ़ माना जाता है। खबरों के मुताबिक, मंत्री वीना जॉर्ज, एम बी राजेश, ओ आर केलू, आर बिंदू, जे चिंचूरानी, पी राजीव, के बी गणेश कुमार, वी एन वासवन, वी शिवनकुट्टी, वी अब्दुरहमान, ए के शशीद्रन और रोशी ऑगस्टीन अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पीछे हैं।
पिनराई विजयन ने पहले ही मान ली थी हार
केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही राज्य की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने सबका ध्यान खींच लिया है। दरअसल, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए गए एक छोटे से बदलाव ने बड़े राजनीतिक संकेत देने शुरू कर दिए थे। सोमवार सुबह होने वाली मतगणना से ठीक पहले विजयन ने अपने आधिकारिक प्रोफाइल से मुख्यमंत्री शब्द हटा दिया था। अब उनके परिचय में केवल माकपा (CPI-M) के पोलित ब्यूरो सदस्य होने का उल्लेख है। इस कदम ने विपक्षी खेमे और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है कि क्या वामपंथी किले में दरार पड़ चुकी है।
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