Assam Election Result 2026 Live : असम विधानसभा चुनाव के नतीजों में BJP गठबंधन ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 126 में से 98 सीटों पर बढ़त बना ली है. वहीं, कांग्रेस गठबंधन मात्र 27 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है. इन रुझानों ने राज्य में एक बार फिर हिमंता बिस्वा सरमा की सत्ता में वापसी पर मुहर लगा दी है. हिमंता की इस आंधी में गौरव गोगोई भी उड़ गए हैं. असम में जोरहाट विधानसभा सीट पर 14 में से 12 दौर की मतगणना के बाद गौरव गोगोई 19000 से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं. जोरहाट से पांच बार विधायक रह चुके हितेंद्र नाथ गोस्वामी यहां से बढ़त बनाए हुए हैं. 7 दौर की मतगणना के बाद बीजेपी के गोस्वामी 59755 वोट हासिल कर चुके हैं. इस बीच, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने हार मानने से इनकार करते हुए कहा कि अभी रुझान शुरुआती हैं और 12 बजे के बाद स्थिति बदलेगी.

दिलचस्प बात यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चुटकी लेते हुए कहा था कि नतीजों के दिन वे पवन खेड़ा को ‘पेड़ा’ बनाकर खिलाएँगे. अब जबकि बीजेपी 100 का आँकड़ा पार कर चुकी है, हिमंता का वह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों ने बीजेपी की इस संभावित जीत के पीछे 5 प्रमुख कारण बताए हैं:

हिमंता बिस्वा सरमा का करिश्माई नेतृत्व

असम में बीजेपी की ताकत का सबसे बड़ा आधार मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की लोकप्रियता है. उनकी सक्रिय कार्यशैली और जनता से सीधा संवाद उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित कर चुका है. मतदाताओं ने उनके चेहरे पर एक बार फिर भरोसा जताया है.

परिसीमन का दांव

साल 2023 में हुए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि 126 सीटों के नए निर्धारण ने एनडीए (NDA) के पक्ष में ‘चुनावी गणित’ को बेहद मजबूत किया, जिससे कई सीटों पर बीजेपी को सीधा फायदा मिलता दिख रहा है.

सरकारी योजनाओं का ‘महिला कार्ड’

राज्य की ‘ओरुनोडोई योजना’ ने महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच बीजेपी की पैठ गहरी की है. इसके अलावा राज्य सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास ने ग्रामीण इलाकों में बीजेपी की स्थिति मजबूत की.

ध्रुवीकरण और कड़े फैसले

चुनाव में बीजेपी ने ‘अवैध घुसपैठ’ और अतिक्रमण के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया. समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के वादे और सरकारी जमीनों को खाली कराने जैसे मुद्दों ने बहुसंख्यक मतदाताओं को पार्टी के साथ जोड़कर रखा.

बिखरा हुआ और कमजोर विपक्ष

कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ जमीन पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाया. गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और कांग्रेस के बीच वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा बीजेपी को मिलता दिख रहा है. बड़े चेहरों के अभाव ने बीजेपी की राह को और आसान बना दिया.

विपक्ष की उम्मीदें धुंधली

कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन (ASOM) को उम्मीद थी कि ऊपरी असम की चाय बागान बेल्ट और मुस्लिम बहुल इलाकों में उन्हें बड़ी बढ़त मिलेगी, लेकिन अब तक के रुझान बताते हैं कि बीजेपी ने इन क्षेत्रों में भी सेंध लगा दी है. दोपहर तक स्थिति और भी स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन फिलहाल गुवाहाटी से लेकर डिब्रूगढ़ तक बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है. असम की जनता ने एक बार फिर स्थिरता और ‘डबल इंजन’ की रफ्तार पर मुहर लगा दी है.

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