दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court ) ने हथियार डीलर संजय भंडारी (Sanjay Bhandari) की कुछ संपत्तियों को जब्त करने की मंजूरी दे दी है। संजय भंडारी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है। ED ने अदालत में भारत और विदेश में स्थित उनकी संपत्तियों की सूची प्रस्तुत करते हुए जब्ती की मांग की थी।मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश संजय जिंदल की अदालत ने कई संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति दी। अदालत ने संपत्तियों को दो श्रेणियों सूची A और सूची B में विभाजित किया है।सूची B में शामिल संपत्तियों पर 18 जुलाई को अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।
संजय भंडारी को पिछले वर्ष भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। इस आदेश को चुनौती देने वाली उनकी अपील हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थी। अदालत में 18 अप्रैल को सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से संपत्तियों को जब्त करने की मांग पर बहस हुई थी, जिसके बाद विशेष न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। इस मामले में संजय भंडारी की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह पेश हुए, जिन्होंने ईडी की संपत्तियों को जब्त करने की याचिका का विरोध किया।
ईडी की ओर से वरिष्ठ वकील ज़ोहेब हुसैन और विशेष लोक अभियोजक एन.के. मट्टा अदालत में पेश हुए। उन्होंने तर्क दिया कि संजय भंडारी से सीधे तौर पर जुड़ी संपत्तियों को जब्त किया जाना आवश्यक है। ईडी ने अदालत को बताया कि संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़कर न भाग सकें और जांच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सकें। एजेंसी ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई आर्थिक अपराधों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया को मजबूत बनाती है और जांच को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद करती है।
ईडी की ओर से वरिष्ठ वकील ज़ोहेब हुसैन ने अदालत को बताया कि एक सूची के अनुसार भारत के साथ-साथ दुबई और ब्रिटेन में भी संजय भंडारी से जुड़ी संपत्तियां मौजूद हैं। इसके अलावा नोएडा और गुरुग्राम में बेनामी संपत्तियों का भी पता चला है। एजेंसी ने कहा कि भंडारी और उसकी पत्नी के नाम पर कई बैंक खाते, गहने और नकदी भी पाई गई है। भारत में दिल्ली के वसंत विहार, पंचशील शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और शाहपुर जाट जैसे क्षेत्रों में अचल संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। गौरतलब है कि संजय भंडारी को 5 जुलाई 2025 को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। ईडी ने अदालत में कहा कि इस मामले में अगला कदम उसकी संपत्तियों को जब्त करना है, ताकि जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके और कानूनी कार्रवाई को प्रभावी बनाया जा सके।
ईडी ने अदालत में आरोप लगाया कि संजय भंडारी ने जानबूझकर भारतीय कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश की है। एजेंसी के अनुसार, उसके पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्तियां मौजूद हैं। ईडी ने यह भी कहा कि भंडारी को भारत प्रत्यर्पित करने से ब्रिटेन की अदालत द्वारा इनकार किए जाने का इस मामले की मौजूदा कार्यवाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि दोनों प्रक्रियाएं स्वतंत्र हैं। एजेंसी ने अदालत से अनुरोध किया कि संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त किया जाए, ताकि आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई में किसी तरह की बाधा न आए।
ED ने दावा किया है कि भंडारी से जुड़ी संपत्तियां भारतीय कानून के तहत आती हैं और इसलिए उनकी जब्ती आवश्यक है। हालांकि, भंडारी की ओर से इस याचिका का विरोध किया गया। उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि ब्रिटेन में उनका रहना पूरी तरह कानूनी है और यह लंदन उच्च न्यायालय के एक फैसले से समर्थित है। बचाव पक्ष ने बताया कि लंदन उच्च न्यायालय ने तिहाड़ जेल में सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए उनके प्रत्यर्पण से इनकार किया था। वकील ने यह भी कहा कि ईडी की याचिका अस्पष्ट है और एजेंसी के पास इस मामले में उचित अधिकार क्षेत्र नहीं है।
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