जमुई। जिले में एक सड़क हादसे ने भारी बवाल का रूप ले लिया। चरका पत्थर थाना क्षेत्र के सरकंडा गांव में आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दो सब-इंस्पेक्टरों (दरोगा) को करीब एक घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने हादसे के मुख्य आरोपी को पकड़ने के बाद मिलीभगत कर छोड़ दिया।

​भीषण टक्कर में बुझ गया घर का चिराग

​घटनाक्रम के अनुसार, सरकंडा निवासी 19 वर्षीय सकिंदर कुमार साह सोमवार रात अपने दो दोस्तों, गोलू कुमार और एक अन्य साथी के साथ सोनो बाजार से खरीदारी कर बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान भगवना मोड़ के समीप विपरीत दिशा से आ रही एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में सकिंदर सहित तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

​इलाज के दौरान मौत और पुलिस पर गंभीर आरोप

​स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को पास के एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया, लेकिन जख्मों की ताव न सहते हुए सकिंदर ने दम तोड़ दिया। घटना के तुरंत बाद डायल 112 की टीम ने मौके पर पहुंचकर दूसरी बाइक के चालक को हिरासत में लिया था। हालांकि, मंगलवार सुबह जब चरका पत्थर थाने के अवर निरीक्षक विनय माझी और उपेंद्र राम पुलिस बल के साथ शव को पोस्टमार्टम के लिए लेने गांव पहुंचे, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

​दरोगाओं को बनाया बंधक, तीखी नोकझोंक

​ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा इस बात पर था कि पुलिस ने हिरासत में लिए गए आरोपी चालक को कथित तौर पर रिहा कर दिया। न्याय की मांग करते हुए ग्रामीणों ने दोनों अधिकारियों को घेर लिया और करीब एक घंटे तक बंधक बनाए रखा। स्थानीय ग्रामीण कल्लू साह और परिजनों ने स्पष्ट कहा कि जब तक आरोपी चालक और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को गांव नहीं लाया जाता, वे शव को नहीं ले जाने देंगे। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच काफी तीखी नोकझोंक भी हुई।

​प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ मामला

​मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। अधिकारियों के आश्वासन और कड़ी समझाइश के बाद ग्रामीण शांत हुए और बंधक बनाए गए दरोगाओं को मुक्त किया गया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई का दावा कर रही है।