सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में दो दिन पहले प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे कि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और दोषियों पर कार्रवाई हो. 

झारखंड के सरायकेला में राजनगर CHC में बिजली गुल होने पर मोबाइल लाइट में डिलीवरी की कोशिश के दौरान मां और उसके नवजात की मौत हो गई.

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. आरोप है कि जिले के राजनगर सीएचसी में प्रसव के दौरान बिजली गुल हो जाने के बाद मोबाइल फोन की रोशनी में डिलीवरी कराने की कोशिश की गई, जिससे मां और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई. घटना के बाद गुस्साए परिजन ने लापरवाही डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस घटना पर दुख जताया है. घटना पर दुख जताते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने प्रभारी चिकित्सक सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं.

प्रारंभिक जांच में प्रशासन का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि बिजली बाधित होने के बाद भी अस्पताल में दूसरे मौजूद इंतजाम- सोलर सिस्टम, इन्वर्टर और जनरेटर का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया. एसडीओ ने इन सभी व्यवस्थाओं का मौके पर निरीक्षण कर संबंधित कर्मियों से जवाब-तलब किया. पूछताछ के दौरान पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अर्जुन सोरेन ने बताया कि घटना की रात सोलर बैटरी चार्ज नहीं थी और लंबे समय से जनरेटर का इस्तेमाल नहीं होने के कारण उसकी स्थिति भी ठीक नहीं थी. इस पर एसडीओ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

जानकारी के अनुसार, मृतक महिला की पहचान हाथीसिरिंग गांव की रहने वाली बिनीता बानरा के रूप में हुई है. वह स्वास्थ्य सहिया थी. परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान अस्पताल की बिजली गुल हो गई और कोई पावर बैकअप नहीं था.

आखिर में महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई. यह घटना राजनीतिक तूल पकड़ती नजर आ रही है. झारखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था को संवेदनहीन बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग खुद ही अस्वस्थ है. जब से कांग्रेस के समर्थन से झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार बनी है राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.

साहू ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, कभी खटिया पर मरीज को लेकर जा रहे हैं तो कभी एंबुलेंस नहीं मिलने पर झोले में मृत बच्चे के शव को घर ले जाने के लिए विवश है.

उपायुक्त नितीश कुमार सिंह के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने रविवार को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अभिनव प्रकाश के नेतृत्व में सीएचसी पहुंचकर प्रारंभिक जांच की. इस दौरान घटना की रात की परिस्थितियों की पड़ताल की गई.

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