राजधानी में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) जल्द ही मुफ्त दाह संस्कार सेवा शुरू करने जा रहा है। इस योजना के तहत आने वाले हफ्तों में इलेक्ट्रिक और CNG-आधारित शवदाह गृहों का उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिकों को बिना किसी शुल्क के अंतिम संस्कार की सुविधा मिल सकेगी। जानकारी के मुताबिक, पारंपरिक लकड़ी आधारित दाह संस्कार से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। इलेक्ट्रिक और CNG आधारित तकनीक न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इससे कम समय में और अधिक स्वच्छ तरीके से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, राजधानी के 33 श्मशान घाटों के संचालन की जिम्मेदारी स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) को सौंपने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, सेवा को लागू कर दिया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि यह मुफ्त सुविधा अगले महीने से शुरू हो सकती है। नगर निगम के मुताबिक, यह व्यवस्था शुरुआत में दो साल के लिए लागू रहेगी। इस दौरान इलेक्ट्रिक और CNG-आधारित शवदाह गृहों के जरिए अंतिम संस्कार की सुविधा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पारंपरिक लकड़ी आधारित दाह संस्कार से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, इन सुविधाओं का संचालन करने वाले स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।नगर निगम ने तय किया है कि इलेक्ट्रिक और CNG-आधारित शवदाह गृहों के रखरखाव और मरम्मत के खर्च को पूरा करने के लिए एनजीओ को हर दाह संस्कार पर लगभग 500 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। इससे इन आधुनिक भट्टियों के संचालन में आने वाली लागत को संतुलित करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि यह योजना पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को बढ़ावा देने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है। नगर निगम पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है, जिसके तहत राजधानी में इलेक्ट्रिक और CNG आधारित दाह संस्कार को पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल शहर में नौ स्थानों पर CNG आधारित दाह संस्कार की सुविधा उपलब्ध है। इनमें सराय काले खां, रोहिणी सेक्टर-26 (कावल्य धाम), द्वारका सेक्टर-24, ग्रीन पार्क, कड़कड़डूमा, गाजीपुर, सुभाष नगर, पंजाबी बाग और हस्तसाल जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं, जहां पर्यावरण के अनुकूल दाह संस्कार की व्यवस्था पहले से संचालित है। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि सराय काले खां में तैयार एक नया श्मशान घाट जल्द ही शुरू होने वाला है। इस अत्याधुनिक सुविधा में एक CNG भट्टी, दो इलेक्ट्रिक भट्टियां और 22 पारंपरिक चिताएं उपलब्ध होंगी, जिससे लोगों को अपनी आवश्यकता और परंपरा के अनुसार विकल्प मिल सकेगा।
अधिकारियों का कहना है कि यह पहल आम लोगों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। अंतिम संस्कार में आने वाले खर्च को कम करने से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक घटेगा। इसके साथ ही यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पारंपरिक लकड़ी आधारित दाह संस्कार की तुलना में इलेक्ट्रिक और CNG आधारित विकल्प अधिक साफ-सुथरे और कम प्रदूषण फैलाने वाले हैं। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे समय में जब दिल्ली लगातार उच्च वायु प्रदूषण स्तर से जूझ रही है, यह पहल शहर में स्वच्छ और टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देगी। इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि लोगों को आधुनिक और सुविधाजनक सेवाएं भी मिलेंगी।
प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने पर सख्ती
CAQM की 130वीं ईटीएफ (Enforcement Task Force) बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए चल रही कार्रवाइयों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार, 11 से 28 अप्रैल 2026 के बीच किए गए निरीक्षणों के आधार पर सख्ती जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान कई उल्लंघनों की पहचान की गई, जिन पर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। बैठक में लिए गए फैसलों के तहत 6 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का प्रस्ताव रखा गया 31 डीजल जनरेटर (DG) सेट्स को सील करने की सिफारिश की गई 6 नोटिस जारी करने की कार्रवाई तय हुई 11 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाने का प्रस्ताव दिया गया CAQM का कहना है कि NCR में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
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