दिल्ली हाई कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrasekhar) की पत्नी लीना पॉलोस (Leena Paulos) को ₹200 करोड़ की जबरन वसूली से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत दे दी है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किया गया था। कोर्ट के इस फैसले से लीना को आंशिक राहत जरूर मिली है, लेकिन उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा। दरअसल, दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा MCOCA के तहत दर्ज एक संबंधित मामले में अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। राहत न मिलने के कारण लीना पॉलोस को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा।
जस्टिस प्रतीक जालान ने दो अलग-अलग मामलों में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत मंजूर कर ली। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किया गया था। हालांकि, MCOCA के तहत दर्ज संबंधित मामले में कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इस केस की जांच दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) कर रही है।
सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप
दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों से करीब ₹200 करोड़ की ठगी की। पुलिस के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर ने खुद को कानून मंत्रालय का अधिकारी बताकर दोनों महिलाओं से संपर्क किया था। उसने यह भरोसा दिलाया कि वह उनके पतियों को कानूनी राहत दिलवा सकता है। इसी झांसे में आकर दोनों महिलाओं ने अपने पतियों की जमानत कराने के लिए उसे करोड़ों रुपये दे दिए। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला सुनियोजित ठगी और जबरन वसूली से जुड़ा है, जिसमें कई स्तरों पर धोखाधड़ी की गई। इस पूरे प्रकरण में लीना पॉलोस की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है।
लीना पॉलोस भी जुर्म में शामिल
बहुचर्चित ₹200 करोड़ जबरन वसूली मामले में सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना पॉलोस पर भी कथित रूप से साजिश में शामिल होने के आरोप लगे हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हाई प्रोफाइल मामले में लीना पॉलोस को वर्ष 2021 में एक्सटॉर्शन (जबरन वसूली) के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूरे रैकेट में उनकी भूमिका की भी पड़ताल की गई है। बाद में 2024 में दायर अपनी जमानत याचिका में लीना ने अदालत के सामने कई आधार रखे। उन्होंने कहा कि ट्रायल में काफी देरी हो रही है वे 3 साल से अधिक समय से जेल में हैं मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है इन्हीं दलीलों के आधार पर उन्होंने अदालत से राहत की मांग की थी।
लीना के खिलाफ चार्जशीट फाइल
दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने लीना पॉलोस के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की है। EOW के अनुसार, लीना पॉलोस पर सुकेश चंद्रशेखर के साथ मिलकर कथित आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप हैं। इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें शामिल हैं। धारा 170 (सरकारी कर्मचारी बनकर धोखाधड़ी) धारा 186 (सरकारी कार्य में बाधा) धारा 384, 386, 388 (जबरन वसूली से जुड़ी धाराएं) धारा 419, 420 (धोखाधड़ी) धारा 406, 409 (आपराधिक विश्वासघात) धारा 468, 471 (जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल) धारा 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला/बाधा) धारा 506 (आपराधिक धमकी) धारा 120B (आपराधिक साजिश) इसके अलावा, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66D (ऑनलाइन धोखाधड़ी) और MCOCA, 1999 की धारा 3 और 4 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग केस
ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है, जिसमें लीना पॉलोस, उनके पति सुकेश चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों को नामजद किया गया है। ईडी के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर शेल कंपनियां बनाकर अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसे वैध दिखाने की कोशिश की। जांच में यह भी सामने आया कि पैसों के लेन-देन के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया, ताकि धन के स्रोत को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। एजेंसी का दावा है कि यह पूरा मामला सुनियोजित आर्थिक अपराध का हिस्सा है, जिसमें ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाकर सिस्टम में वापस लाया गया।
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