राजधानी दिल्ली के बाहरी इलाके मुंडका में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। खुले नाले में गिरने से दो साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर शहर में बुनियादी ढांचे और लापरवाही की गंभीर स्थिति को उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार, इलाके में नाले की सफाई का कार्य हाल ही में किया गया था, लेकिन उसे सही तरीके से ढका नहीं गया। इसी लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ। खेलते-खेलते बच्ची खुले नाले के पास पहुंची और उसमें गिर गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्ची को बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हुई मासूम
बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके में दो साल की मासूम बच्ची अचानक घर के बाहर से लापता हो गई। यह घटना 60 फुटा रोड स्थित राज मंदिर के सामने की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासी विकास अपनी पत्नी के साथ सुबह करीब 11 बजे घर के रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। इसी दौरान उनकी दो साल की बेटी अंशिका घर के बाहर खेल रही थी। कुछ ही देर में बच्ची खेलते-खेलते नजरों से ओझल हो गई। बच्ची के अचानक गायब होने से परिवार में हड़कंप मच गया। परिजन तुरंत आसपास के इलाके में उसकी तलाश में जुट गए और स्थानीय लोगों को भी इसकी सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल बन गया।
नाले में मिला बच्ची का सुराग
घटना 60 फुटा रोड स्थित राज मंदिर के सामने की है। जानकारी के मुताबिक, विकास अपनी पत्नी के साथ शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे घरेलू कामों में व्यस्त थे। इसी दौरान उनकी दो साल की बेटी अंशिका घर के बाहर खेल रही थी। कुछ ही देर बाद वह अचानक नजरों से ओझल हो गई, जिससे परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत आसपास तलाश शुरू की। जब काफी देर तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने पड़ोसियों को भी साथ लेकर खोजबीन तेज कर दी। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद घर के पास ही एक खुले नाले में बच्ची के गिरने का पता चला।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मासूम अंशिका की मौत पानी में डूबने के कारण हुई है। इस पुष्टि के बाद मामले ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि बच्ची खुले नाले तक कैसे पहुंची और वहां सुरक्षा व्यवस्था या ढक्कन जैसी कोई व्यवस्था मौजूद थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या यह पूरी तरह से दुर्घटना थी या लापरवाही का मामला। स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि घटना के समय की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नाले की सफाई के बाद नहीं लगाया गया ढक्कन
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि करीब एक माह पहले सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा नाले की सफाई कराई गई थी। इस दौरान नाले के ऊपर लगे ढक्कन हटाए गए थे, लेकिन सफाई के बाद उन्हें दोबारा ठीक से बंद नहीं किया गया, जिससे यह खुला और खतरनाक स्थिति में रह गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण यह नाला अब एक खुले खतरे में बदल गया, जिसका खामियाजा मासूम बच्ची को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। बताया जा रहा है कि यह नाला 60 फुटा रोड के डेड-एंड हिस्से से जुड़ा हुआ है, जहां से पानी का बहाव दिल्ली से हरियाणा की दिशा में मुड़ता है। इस संरचना के कारण अगर कोई व्यक्ति या बच्चा इसमें गिर जाए तो बाहर निकल पाना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिससे ऐसे हादसे और भी अधिक जानलेवा साबित होते हैं।
शव घर पहुंचते ही फूटा लोगों का गुस्सा
मृत बच्ची अंशिका के पिता विकास की शादी करीब तीन साल पहले हुई थी और वह उनकी इकलौती संतान थी। इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही के कारण ही उनकी मासूम बेटी की जान गई। पोस्टमार्टम के बाद जब बच्ची का शव घर लाया गया तो पूरे इलाके में माहौल गम और आक्रोश में बदल गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और आसपास के लोग भी इस दर्दनाक घटना से भावुक हो उठे। स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का मामला बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई। लोगों ने मांग की कि जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई हो और खुले नालों को तुरंत सुरक्षित ढंग से ढका जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।
विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप
प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि अगर नाले की सफाई के बाद उसे ठीक से ढक दिया गया होता, तो यह दर्दनाक हादसा टल सकता था और एक मासूम बच्ची की जान नहीं जाती। गुस्साए लोगों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और मौके पर जमकर विरोध जताया। इस दौरान सड़क पर भीड़ जमा होने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
इस तरह के हादसे पहले भी इलाके में हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि नालों की सुरक्षा और ढक्कन की उचित व्यवस्था को लेकर बार-बार लापरवाही सामने आती रही है, लेकिन केवल अस्थायी सुधार या सफाई तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है। इसके कारण क्षेत्र में खतरा लगातार बना हुआ है और कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
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