देहरादून. नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने विधानसभा में महिलाओं के सुरक्षा और उनके अधिकार का मुद्दा उठाया. साथ ही महिलाओं को सशक्त बनाने में उचित कदम उठाने की मांग की. इस दौरान यशपाल आर्य ने कहा, कांग्रेस हमेशा से सुधार और प्रगति की राजनीति करती आई है. हरित क्रांति से कृषि को बदला. श्वेत क्रांति से दुग्ध उत्पादन को सशक्त किया. अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी. भारत को परमाणु शक्ति बनाया. 1991 में अर्थव्यवस्था को उदारीकृत किया. 60 करोड़ से अधिक आधार कार्ड मोदी जी के आने से पहले ही दिए जा चुके थे. सूचना का अधिकार (RTI), शिक्षा का अधिकार (RTE), खाद्य सुरक्षा कानून, मनरेगा ये सब कांग्रेस की देन हैं.
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आगे यशपाल आर्य ने कहा, महिलाओं के अधिकारों की बात करें तो हिंदू कोड बिल- जिसका बीजेपी के वैचारिक पूर्वजों ने विरोध किया. कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून, घरेलू हिंसा कानून औऱ न्यायमूर्ति वर्मा समिति की सिफारिशों पर आपराधिक कानून सुधार ये सभी कांग्रेस की देन हैं. कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के अधिकार को मजबूत किया है. लेकिन भाजपा का रिकॉर्ड क्या है? अंकिता भण्डारी हत्याकांड में भाजपा नेता एवं वीआईपी का अभी तक पता नहीं. हरिद्वार के शांतरशाह में दलित युवती की दुष्कर्म के बाद हत्या में भाजपा नेता. चंपावत में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म में भाजपा मण्डल अध्यक्ष और चमोली के देवाल में पिकी की हत्या का सम्बन्ध भाजना नेता से है.
आगे उन्होंने कहा, ऐसे ही उत्तराखण्ड में अधिकतर महिला अपराधों में बीजेपी नेताओं की संलिप्तता है. हाथरस पर जवाब नहीं, उन्नाव पर जवाब नहीं, हरियाणा की महिला पहलवानों के साथ व्यवहार पर जवाब नहीं, अपनी ही पार्टी में अपराधियों को संरक्षण, बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई, अपराधियों का सम्मान और माला पहनाना और NCRB के आंकड़े बताते हैं महिलाओं के खिलाफ अपराध भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक हैं.
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आगे यशपाल आर्य ने कहा, यह केवल एक विधेयक की लड़ाई नहीं है यह संविधान की आत्मा को बचाने की लड़ाई है. गरिमा कोई उपहार नहीं है. यह हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. अगर सरकार सच में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो उसे नारे नहीं, निर्णय लेने होंगे. उसे प्रचार नहीं, अधिकार देने होंगे और अगर वह ऐसा नहीं करती तो देश की महिलाएं सब देख रही हैं, समझ रही हैं, और समय आने पर जवाब भी देंगी. हम अक्सर बड़े गर्व से कहते हैं “नारी शक्ति”, “मातृशक्ति”, “महिला सशक्तिकरण” – हर मंच पर इन शब्दों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन मैं इस सदन से पूछना चाहता हूं कि क्या सच में हमारी मातृशक्ति सशक्त है.
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