ODISHA DESK, भुवनेश्वर: भारत के औद्योगिक विकास के अगले चरण को नई ऊंचाई देने के लिए ओडिशा पूर्वी तट (East Coast) के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में तैयार है। गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर आए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को मुंद्रा पोर्ट का दौरा किया और उद्योग जगत के दिग्गजों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री माझी ने संतुलित राष्ट्रीय विकास मॉडल पर जोर देते हुए कहा कि अब तक भारत के समुद्री व्यापार और औद्योगिक विकास में पश्चिमी तट का दबदबा रहा है, लेकिन अब पूर्वी तट एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। उन्होंने निवेशकों के सामने ‘टू-कोस्ट स्ट्रैटेजी’ का प्रस्ताव रखा, जिसमें उद्योगपतियों से दोनों तटों के बीच अपने परिचालन को एकीकृत करने का आग्रह किया गया।

“पश्चिमी तट पर जो सफलता हासिल की गई है, उसे अब पूर्वी तट तक विस्तारित करने की आवश्यकता है। ओडिशा वह इकोसिस्टम, कनेक्टिविटी और नीतिगत समर्थन प्रदान करता है जो इस परिवर्तन को संभव बनाएगा।” – सीएम मोहन चरण माझी

निवेश और बुनियादी ढांचे पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि ओडिशा की रणनीतिक स्थिति दक्षिण-पूर्वी एशिया और पूर्वी एशिया के निकट है, जो इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक आदर्श केंद्र बनाती है। राज्य सरकार की उपलब्धियों को साझा करते हुए उन्होंने कहा पिछले 22 महीनों में ₹8.37 लाख करोड़ मूल्य के 433 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनमें से ₹2.86 लाख करोड़ की 148 परियोजनाओं पर काम पहले ही शुरू हो चुका है। ओडिशा में निवेश के इरादों को तेजी और पैमाने (Speed and Scale) के साथ धरातल पर उतारा जा रहा है।

मुख्यमंत्री के साथ उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वैन और मुख्य सचिव अनु गर्ग भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुंद्रा में कंटेनर और वीएलसीसी (VLCC) जेटी के साथ-साथ एसईजी (SEZ) में स्थित तांबा निर्माण, सौर सेल और पवन टरबाइन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों का अवलोकन किया।

अधिकारियों के अनुसार, धामरा, पारादीप और गोपालपुर जैसे बंदरगाह ओडिशा में पोर्ट-एलईडी औद्योगिकीकरण (Port-led Industrialisation) के स्तंभ बन रहे हैं। राज्य अब लॉजिस्टिक्स, केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े अवसरों की पेशकश कर रहा है।

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