भागलपुर: बिहार की राजनीति में सामाजिक समीकरणों को धार देने की कड़ी में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। भागलपुर के गोपालपुर से जेडीयू विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में मंत्री पद की शपथ ली। बुलो मंडल का मंत्री बनना न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक करियर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर जेडीयू की अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को लामबंद करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
RJD के ‘बागी’ से JDU के ‘मंत्री’ तक का सफर
बुलो मंडल का राजनीतिक ग्राफ काफी दिलचस्प रहा है। लंबे समय तक आरजेडी और लालू प्रसाद यादव के करीब रहे बुलो मंडल ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पाला बदला था। आरजेडी से टिकट न मिलने के कारण उन्होंने बागी रुख अख्तियार किया और जेडीयू का दामन थाम लिया। पार्टी ने उनकी जमीनी पकड़ को देखते हुए 2025 के विधानसभा चुनाव में गोपालपुर से सिटिंग विधायक गोपाल मंडल का टिकट काटकर उन्हें मैदान में उतारा, जहां उन्होंने शानदार जीत दर्ज की।
शाहनवाज हुसैन को हराकर चर्चा में आए थे बुलो
49 वर्षीय बुलो मंडल की पहचान एक ‘जायंट किलर’ के रूप में रही है। 2014 की मोदी लहर के बावजूद उन्होंने भागलपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी के कद्दावर नेता सैयद शाहनवाज हुसैन को पटखनी दी थी। इससे पहले वे बिहपुर विधानसभा सीट से भी आरजेडी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। उनकी पत्नी बर्षा रानी भी बिहपुर से विधायक रह चुकी हैं, जो इस परिवार की क्षेत्र में गहरी राजनीतिक पैठ को दर्शाता है।
साफ छवि और अति पिछड़ा कार्ड
2025 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, बुलो मंडल पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनकी इसी बेदाग छवि और मंडल समुदाय के बीच मजबूत प्रभाव का लाभ उठाने के लिए मुख्यमंत्री ने उन्हें कैबिनेट में जगह दी है। पार्टी को उम्मीद है कि कोसी और सीमांचल क्षेत्र, विशेषकर भागलपुर और नवगछिया में, बुलो मंडल के जरिए अति पिछड़ा वोटों को पूरी तरह से जेडीयू के पक्ष में मोड़ा जा सकेगा।
संगठन और क्षेत्र में मजबूत पकड़
बुलो मंडल को ग्रामीण राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। बाढ़, कटाव और ग्रामीण रोजगार जैसे स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता का प्रिय बनाया है। जेडीयू में शामिल होने के बाद से ही नीतीश कुमार ने उन्हें संगठन में विशेष महत्व दिया, जिसका परिणाम आज मंत्री पद के रूप में सामने आया है।
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