​जमुई/विजय कुमार। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए बिहार निगरानी विभाग ने शुक्रवार को जमुई जिले के सोनो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने एक एएनएम से वेतन भुगतान के बदले 37 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए स्वास्थ्य केंद्र के लिपिक (क्लर्क) रूपेश कुमार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस अचानक हुई छापेमारी से पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया।

​11 महीने के वेतन के बदले मांगी थी घूस

​मामले की जड़ में एक एएनएम की रुकी हुई सैलरी थी। पीड़ित एएनएम राजनंदनी का आरोप है कि उनका पिछले 11 महीनों का वेतन लंबित था। इस बकाया राशि को क्लियर करने के नाम पर क्लर्क रूपेश कुमार द्वारा एक महीने के पूरे वेतन यानी 37 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। फरवरी 2025 से ही आरोपी क्लर्क पीड़िता को परेशान कर रहा था। अंततः विवश होकर राजनंदनी ने 23 मार्च को पटना स्थित निगरानी विभाग के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

​जमीन गिरवी रखकर जुटाए थे रिश्वत के पैसे

​पीड़िता की आपबीती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राजनंदनी ने बताया कि सैलरी न मिलने और क्लर्क के दबाव के कारण उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें रिश्वत की रकम जुटाने के लिए अपनी जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीएचसी प्रभारी शशि भूषण की शह पर ही यह सारा खेल चल रहा था और रूपेश कुमार अपने दबंग रसूख के कारण अन्य कर्मचारियों को भी डरा कर रखता था। पूर्व में भी कई स्वास्थ्य कर्मियों से अवैध वसूली की बात सामने आई है।

​निगरानी विभाग का जाल और गिरफ्तारी

​शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग के पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। आरोपों के सत्यापन के बाद, शुक्रवार को जैसे ही एएनएम ने क्लर्क रूपेश कुमार को 37 हजार रुपये थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी की टीम ने उसे दबोच लिया। डीएसपी पवन कुमार ने पुष्टि की कि आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली गई है। फिलहाल गिरफ्तार लिपिक को पटना ले जाया गया है, जहां कागजी कार्रवाई के बाद उसे निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।