Bengal CM Suvendu Adhikari, लखनऊ. बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद अब बंगाल के मुख्यमंत्री का चेहरा सामने आ गया है. भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल ने सुवेंदु अधिकारी को अपना नेता चुन लिया है. यानी सुवेंदु अधिकारी बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे (Bengal CM Suvendu Adhikari). इधर सीएम योगी ने उन्हें विधायक दल का नेता चुने जाने की बधाई दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि ‘श्री सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुने जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.’ सुवेंदु कल यानी शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

बता दें कि पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लग गई है. अमित शाह से हरी झंडी मिलने के बाद विधायक दल की बैठक में सुवेंदु को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. अमित शाह ने कहा कि बैठक में सभी प्रस्ताव सुवेंदु के पक्ष में हैं, इसीलिए सुवेंदु को सर्वसम्मति के साथ विधायक दल का नेता चुनता हूं. बता दें कि, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की भारी जीत के प्रमुख नायकों में सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे ऊपर है. एक समय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहे सुवेंदु ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी जॉइन की और पार्टी को 3 सीटों से 77 पार कराते हुए दो तिहाई बहुमत की राह दिखाई. उनकी जमीनी रणनीति, नंदीग्राम की विरासत और ममता की चुनावी कमजोरियों को भेदने का हुनर बंगाल की राजनीति में सबसे ज्यादा काम आया. जानकारी के अनुसार कल सुबह 11 बजे सुवेंदु मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

इसे भी पढ़ें : कल सुबह 11 बजे शुभेंदु अधिकारी लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ, अग्निमित्रा पॉल और निसिथ प्रमाणिक बनेंगे डिप्टी सीएम

सुवेंदु अधिकारी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2007 का नंदीग्राम आंदोलन रहा. वामपंथी सरकार द्वारा किसानों की जमीन अधिग्रहण के फैसले के खिलाफ उन्होंने ‘भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी’ (BUPC) का गठन किया. ममता बनर्जी मीडिया और दिल्ली में आवाज उठा रही थीं, लेकिन नंदीग्राम की पगडंडियों पर असली लड़ाई शुभेंदु लड़ रहे थे.

वे रातों को गांवों में रुकते, स्थानीय भाषा में लोगों से बात करते और पुलिस-काडर के दबाव के खिलाफ किसानों की ढाल बने. 14 मार्च 2007 की पुलिस फायरिंग के बाद भी उन्होंने घायलों की मदद की और आंदोलन को मजबूत रखा. जानकार मानते हैं कि नंदीग्राम आंदोलन की सफलता में सुवेंदु की जमीनी भूमिका अहम थी, जिसने 2011 में 34 साल पुरानी वाम सरकार के पतन का रास्ता तैयार किया.