पटना। शहर की सड़कों पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे TRE-4 (शिक्षक नियुक्ति चरण-4) के अभ्यर्थियों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज कर दिया। अभ्यर्थियों को न केवल खदेड़ा गया, बल्कि उन्हें सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। इस घटना के बाद घटनास्थल पर अभ्यर्थियों के जूते-चप्पल बिखरे नजर आए, जो पुलिसिया कार्रवाई की भयावहता को बयां कर रहे थे।
राजेश राम का पलटवार: ‘सरकार की नियत साफ हो गई’
बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए नई सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि निहत्थे अभ्यर्थियों पर लात-घूंसे और लाठियां बरसाना नई सरकार की असली नीति को दर्शाता है। राम ने आरोप लगाया कि सरकार का खजाना खाली हो चुका है और वे कर्ज के सहारे काम चला रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार करोड़ों रोजगार देने का दावा करती है, तो सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने के बजाय लाठियां क्यों दी जा रही हैं? उन्होंने इसे असंवैधानिक कार्य करार दिया।
JP गोलंबर पर संघर्ष: बिना चेतावनी के लाठीचार्ज
प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 10 बजे पटना कॉलेज से हुई थी, जहां लगभग 5,000 अभ्यर्थी विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर BPSC कार्यालय की ओर कूच कर रहे थे। पुलिस ने JP गोलंबर पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। जब अभ्यर्थी आगे बढ़ने पर अड़े, तो पुलिस ने बिना वाटर कैनन या आंसू गैस का इस्तेमाल किए, सीधे लाठीचार्ज शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि मौके पर तीन बसों में भरकर लाठियां मंगवाई गई थीं।
क्यों भड़का अभ्यर्थियों का गुस्सा?
छात्र नेता दिलीप कुमार के अनुसार, प्रदर्शन का मुख्य कारण प्रशासन की वादाखिलाफी है। BPSC परीक्षा नियंत्रक ने 16 अप्रैल को एक पॉडकास्ट के जरिए भरोसा दिलाया था कि TRE-4 का विज्ञापन 3-4 दिनों में आ जाएगा और 25 अप्रैल से आवेदन शुरू होंगे। आज 8 मई बीत जाने के बाद भी विज्ञापन का कहीं अता-पता नहीं है, जिससे अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे गया।
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