नीरज काकोटिया, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट की वारासिवनी पुलिस ने सूदखोरी का एक बड़ा मामला उजागर किया है। आरोपी सुनील अरोरा ने सूदखोरी का ऐसा मकड़जाल बिछाया कि उसमें छोटे कर्मचारी व गरीब परिवार फंसते गये। इसी के चलते उसने अपने कब्जे में कर्ज लेने वालों से भारी भरकम राशि वसूलने के साथ ही ब्लैंक चैक,ऋण पुस्तिका व स्टांप पेपर भी प्राप्त कर रख लिया। ताकि बाद में वह उन्हें ब्लैकमेल कर सके। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 153 ब्लैंक चैक, 15 स्टांप पेपर, 15 ऋण पुस्तिका,फर्म बनाकर आदिवासी के नाम पर खरीदी गई 6 रजिस्ट्री जप्त की हैं।


पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि आरोपी सुनील अरोरा निवासी वारासिवनी के सूदखोरी से परेशान लोगों की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की जांच में पाया गया कि वह कुछ रकम देकर सूदखोरी का कार्य कर रहा था। इसके लिये उसने छोटे कर्मचारियों व उन गरीब परिवार को अपने जाल में फंसाया जो किसी ना किसी परेशानी में होते थे। जिसके एवज में उन लोगों के पति-पत्नी के अलग-अलग हस्ताक्षरयुक्त ब्लैंक चैक ले लेता था। ताकि उसे राशि नही मिलने पर वह कोर्ट के माध्यम से केस कर अपनी राशि जो उसमे उल्लेख की है उसे प्राप्त कर सके। इसी तरह से कोरे स्टांप पेपर व ऋण पुस्तिका भी रख लेता था। इसी के चलते बाद में उसने एक आदिवासी परिवार के नाम पर लिमन फर्म बना लिया और उसके नाम पर आदिवासियों की अलग-अलग जमीन खरीदी कर ली। जिसकी 6 रजिस्ट्री बरामद हुई है। 

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एक महिला कर्मचारी को ऋण देने के नाम पर उससे राशि भी वसूल की और उसके नाम पर लोन में फोर व्हीलर भी ले लिया। जिसको भी उसने अपने पास ही रख लिया था। इस मामले में आरोपी को गिरफतार कर रिमांड पर लिया गया हैं। सूदखोरी का प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपी के कब्जे से बहुतायत में ब्लैंक चैक, स्टांप पेपर, रजिस्ट्रया व ऋण पुस्तिका बरामद की गई है। अब तक 10  फरियादी सामने आये हैं। अब लगातार लोग सामने आ रहे है।

वहीँ एक महिला सेवानिवृत्त कर्मचारी ने बताया कि उसने डेढ़ लाख रूपये कर्ज लिया था और 8 लाख रूपये चुका दिये थे। बावजूद उसके ब्लैकं चैक के माध्यम से ब्लैकमेल करते हुये नाम पर फोर व्हीलर वाहन खरीदी कर रख लिया था। इस वाहन का वह किश्त भी चुका रही है। आदिवासी के नाम पर फर्म बनाने के संबंध में पीड़ित ने बताया कि उसने भी कर्ज लिया था और इसी के चलते पति व पत्नी ने उसे चैक दे दिया था। बाद में उसने इस राशि को लेने के पश्चात हमारे नाम पर फर्म बना लिया और अलग-अलग तीन-तीन प्रापर्टी की खरीदी कर ली।

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