द्वारका जिला अदालत ने जनकपुरी क्षेत्र में गड्ढे में गिरकर एक बाइक सवार की मौत के मामले में दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया। अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपियों की लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हरजोत सिंह औजला की अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी व्यस्त सड़क पर बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी संकेतों के खुदाई कार्य करना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। अदालत ने माना कि ऐसी लापरवाही आम लोगों की जान को खतरे में डाल सकती है।
मृतक के परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता आस्था चतुर्वेदी ने अदालत में दलील दी कि संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। जांच में सामने आया कि व्यस्त सार्वजनिक सड़क पर गड्ढा खोदे जाने के बावजूद वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। चार्जशीट के अनुसार, हादसा सिस्टम और ठेकेदारों की कथित अनदेखी का परिणाम था। चश्मदीदों के बयान और सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि दुर्घटना के समय मौके पर न तो बैरिकेडिंग थी, न कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही रात के समय के लिए किसी प्रकार की चेतावनी लाइट की व्यवस्था की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि युवक की मौत के बाद कथित तौर पर अपनी लापरवाही छिपाने के लिए जल्दबाजी में वहां बैरिकेड लगाए गए। पुलिस के मुताबिक, सड़क खुदाई का काम मुख्य कंपनी द्वारा आगे सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दिया गया था। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मजदूर योगेश ने उप-ठेकेदार राजेश कुमार को पहले ही आगाह किया था कि बिना सुरक्षा इंतजाम के काम कराना खतरनाक साबित हो सकता है। बावजूद इसके चेतावनी को नजरअंदाज किया गया, जिसके बाद यह हादसा हुआ।
फर्जी आधार कार्ड से छिपाई पहचान
अदालत ने आरोपी राजेश कुमार, योगेश और मुख्य कंपनी के निलंबित निदेशक हिमांशु गुप्ता के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने को कहा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि हिमांशु गुप्ता ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी। पुलिस जांच में इस पहलू को भी गंभीरता से शामिल किया गया है। फिलहाल राजेश कुमार और योगेश न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं, जबकि अदालत ने हिमांशु गुप्ता को समन जारी कर अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया है।
अप्रैल में दाखिल की थी चार्जशीट
दिल्ली पुलिस ने जनकपुरी सड़क हादसा मामले में 7 अप्रैल को अदालत में 877 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया था। इस चार्जशीट में तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने हिमांशु गुप्ता, राजेश कुमार प्रजापति और योगेश को मामले में आरोपी बनाया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 238बी, 61(2), 340(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि यह हादसा 5 फरवरी की देर रात जनकपुरी क्षेत्र में हुआ था। हादसे में कमल ध्यानी नामक युवक की जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि मौके पर सुरक्षा बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण यह गंभीर दुर्घटना हुई। अदालत ने मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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