राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने शुक्रवार से एक नई प्रदूषण नियंत्रण पहल शुरू की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में जमीनी स्तर पर प्रदूषण की निगरानी को मजबूत करना और अलग-अलग प्रदूषण स्रोतों की तेजी से पहचान कर उनका समाधान करना है। अधिकारियों के मुताबिक, इस नई पहल को ‘Road RADAR’ (Real Time Air Pollution Detection Across Roads) नाम दिया गया है। इसके तहत राजधानी के प्रत्येक जिले में विशेष सर्वेक्षकों की तैनाती की जाएगी, जो सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति का लगातार निरीक्षण करेंगे।

यह टीम धूल प्रदूषण, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, कूड़ा जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं और अन्य प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों को तुरंत जानकारी देगी, ताकि मौके पर ही कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रणाली से प्रदूषण संबंधी शिकायतों और समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया तेज होगी। अधिकारियों के अनुसार, ये सर्वेक्षक एक विशेष मोबाइल ऐप की मदद से रियल-टाइम डेटा एकत्र करेंगे और उसे सीधे केंद्रीय निगरानी प्रणाली तक पहुंचाएंगे।

इस तकनीक आधारित व्यवस्था का उद्देश्य राजधानी दिल्ली की सड़कों का व्यवस्थित सर्वे करना और प्रदूषण के स्तर पर लगातार नजर बनाए रखना है। सर्वेक्षक सड़क धूल, वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण गतिविधियों, कचरा जलाने और अन्य प्रदूषण स्रोतों से जुड़ी जानकारी तुरंत रिकॉर्ड करेंगे। रियल-टाइम डेटा मिलने से प्रदूषण के हॉटस्पॉट यानी सबसे अधिक प्रदूषित इलाकों की पहचान तेजी से की जा सकेगी। इसके बाद संबंधित विभागों और एजेंसियों को तुरंत अलर्ट भेजकर मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की योजना है।

अधिकारियों के मुताबिक, ‘Road RADAR’ कार्यक्रम के तहत 13 सर्वेक्षकों की टीम राजधानी दिल्ली की लगभग 18,000 किलोमीटर लंबी सड़क नेटवर्क की निगरानी करेगी। इन सड़कों में दिल्ली नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC), लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली छावनी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी वार्ड शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के जरिए दिल्ली के पूरे सड़क नेटवर्क को हर महीने व्यवस्थित रूप से कवर किया जाएगा। योजना के अनुसार, प्रत्येक सर्वेक्षक को प्रतिदिन कम से कम 20 किलोमीटर सड़क क्षेत्र का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। सर्वेक्षक मोबाइल ऐप के जरिए सड़क धूल, कचरा जलाने, निर्माण गतिविधियों और अन्य प्रदूषण स्रोतों से जुड़ा रियल-टाइम डेटा रिकॉर्ड करेंगे।

अधिकारियों के अनुसार, ‘Road RADAR’ कार्यक्रम के तहत तैनात सर्वेक्षक अपनी निगरानी जिम्मेदारी निभाने के दौरान MCD 311 मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करेंगे। इस ऐप की मदद से सर्वेक्षक ‘जियो-टैग’ यानी स्थान-चिह्नित जमीनी सर्वे करेंगे, ताकि प्रदूषण से जुड़े मामलों की सटीक लोकेशन रिकॉर्ड की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक सर्वेक्षक को प्रतिदिन कम से कम 70 ऐसे प्रदूषण संबंधी बिंदुओं की पहचान करनी होगी, जिनकी जियो-लोकेशन और तस्वीरें ऐप पर अपलोड की जाएंगी। इनमें सड़क पर जमा धूल, निर्माण स्थलों से फैलता प्रदूषण, खुले में कचरा जलाना, मलबा फैलना, धुएं का उत्सर्जन और अन्य प्रदूषण स्रोत शामिल हो सकते हैं। सर्वेक्षक द्वारा भेजी गई जानकारी रियल-टाइम में संबंधित विभागों तक पहुंचेगी, ताकि समस्या वाले क्षेत्रों में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

पर्यावरण मंत्री ने बताए नई प्रक्रिया के सारे फायदे

मंजिंदर सिंह सिरसा ने ‘Road RADAR’ पहल को राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक अहम कदम बताया है। उन्होंने कहा, “स्वच्छ हवा के लिए दिल्ली की लड़ाई को जमीनी स्तर पर हर गली और हर सड़क में जीता जाना चाहिए। ‘Road RADAR’ के जरिए सरकार रोजाना निगरानी, रियल-टाइम रिपोर्टिंग और सीधे तौर पर विभागीय जवाबदेही की एक वैज्ञानिक प्रणाली शुरू कर रही है।” सिरसा के अनुसार, इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदूषण के स्रोतों को नजरअंदाज न किया जाए, उनकी पुनरावृत्ति रोकी जाए और उन्हें लंबे समय तक बने रहने का मौका न मिले। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत जमीनी स्तर पर सर्वेक्षक मोबाइल ऐप के जरिए प्रदूषण संबंधी डेटा और जियो-टैग्ड तस्वीरें साझा करेंगे। इससे संबंधित विभागों को रियल-टाइम में कार्रवाई करने और प्रदूषण के हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

नई प्रणाली कूड़ा हटाने में करेगी विभाग की मदद

मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए लगातार निगरानी, समय पर पहचान और जवाबदेह प्रशासन बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, ‘Road RADAR’ पहल इसी सोच के तहत तैयार की गई है, ताकि प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम में पहचान कर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सिरसा ने कहा, “यह पहल सड़कों की धूल, कूड़ा फेंकने की जगहों, खुले में आग जलाने, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण के अन्य स्रोतों की रियल-टाइम मैपिंग करती है। इससे संबंधित विभागों को तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलती है।”

उन्होंने बताया कि यह नई तकनीक आधारित प्रणाली विभागों के बीच समन्वय बेहतर करेगी और शिकायतों या प्रदूषण स्रोतों पर कार्रवाई में होने वाली देरी को कम करेगी। साथ ही जवाब देने में लगने वाला समय भी घटेगा और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों की जवाबदेही अधिक मजबूत होगी। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की इस पहल पर जोर देते हुए सिरसा ने कहा, “संदेश बिल्कुल साफ है प्रदूषण के जिस भी स्रोत की पहचान हो, उस पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। हर विभाग को जवाब देना होगा और हर एजेंसी को जवाबदेह बने रहना होगा।”

अलग-अलग तरह के 11 प्रदूषण स्रोतों पर रखेंगे नजर

अधिकारियों के अनुसार, ‘Road RADAR’ कार्यक्रम राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के 11 प्रमुख स्रोतों पर विशेष निगरानी रखेगा। इसका उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले जमीनी कारणों की पहचान कर उन पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस निगरानी व्यवस्था के तहत कच्ची सड़कों, टूटे फुटपाथों, डिवाइडरों और गड्ढों से उड़ने वाली धूल पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा सड़कों के किनारे जमा रेत, ढीले मलबे और अनियंत्रित पार्किंग स्थलों को भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल किया गया है।

कार्यक्रम के दायरे में ओवरफ्लो होते कूड़े के ढेर, डंपिंग साइट्स और सड़कों के किनारे फैला कचरा भी रहेगा। साथ ही बायोमास, प्लास्टिक और खुले में कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों की रियल-टाइम पहचान की जाएगी, क्योंकि ये वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। इसके अलावा निर्माण और तोड़फोड़ (Construction & Demolition) से निकलने वाले मलबे, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और सड़कों व डिवाइडरों के आसपास हरियाली की कमी वाले क्षेत्रों को भी निगरानी में रखा जाएगा। फील्ड सर्वे के दौरान सामने आने वाले अन्य बिखरे हुए प्रदूषण स्रोतों की भी पहचान कर उन्हें रिकॉर्ड किया जाएगा।

नई व्यवस्था में ऑटोमैटिक शिकायत प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत जैसे ही कोई सर्वेक्षक MCD 311 ऐप पर प्रदूषण से जुड़ी किसी समस्या की रिपोर्ट अपलोड करेगा, शिकायत स्वतः संबंधित अधिकारी के पास कार्रवाई के लिए पहुंच जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतों को उनके अधिकार क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग एजेंसियों को भेजा जाएगा। इनमें दिल्ली नगर निगम (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD), भारतीय रेलवे और अन्य शहरी स्थानीय निकाय शामिल हैं।

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