देहरादून. पूर्व सीएम हरीश रावत ने रील बनाने और वायरल करने को लेकर चिंता जाहिर की है. हरीश रावत ने कहा, कल मैंने एक पोस्ट डाली थी कि रील बनाने का शौक कितना गहरा हो गया है. ऐसे ही शौक में एक नौजवान पॉक्सो एक्ट में मुकदमा झेलने जा रहा है. उसमें सोशल मीडिया में आने के शौक के साथ-साथ लोगों की समस्याओं से जुड़ने का जज्बा भी है और उसी जोश में वह राज्य सरकार की एक बहुत ही दुखती रग दबा बैठा है. मेरा मानना है कि He is a young man in daring Hurry. चंपावत में एक कथित गैंगरेप, जिसमें पिता पहले तो FIR दर्ज करवाता है और बाद में इंकार करता है. षड्यंत्र के दोनों मूल पक्ष भाजपा के ही हैं, एक पक्ष में पूर्व मंडल अध्यक्ष है तो दूसरे पक्ष में वर्तमान भाजपा मंडल उपाध्यक्ष है. इस सारे प्रकरण में दो बातें बिल्कुल स्पष्ट हैं.
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चंपावत में सत्ता की खुरचन के लिए मंडल स्तर तक गैंगवार चल रहा है. इस प्रकरण में हर पिता शर्मिंदा हुआ है. पहले पीड़िता के पिता शिकायत दर्ज करते हैं कि मेरी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है और 48 घंटे पुलिस हिरासत में रहने के बाद वह और उनकी बेटी सामूहिक बलात्कार से बिल्कुल इनकार कर देते हैं. इस संदर्भ में पुलिस और मेडिकल के उच्च अधिकारियों के विभिन्न बयानों में विरोधाभास है. खैर, मैं इस मामले में आगे कुछ नहीं कहूंगा. क्योंकि अंततः मामला माननीय कोर्ट में जाएगा.
मुझे आश्चर्य है कि भाजपा का शीर्ष इस प्रकरण में कांग्रेस को लपेटने का प्रयास कर रहा है. मैंने चंपावत और देहरादून के सभी समाचार पत्रों की कतरनें मंगाई. मुझे कहीं भी षड्यंत्रकर्ता के तौर पर आनंद महरा की भूमिका दिखाई नहीं दी है. उसका अपराध इतना भर है कि भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष ने जब उसे पूरा प्रकरण बताया तो वह भागा-भागा थाने पहुंचा और उसने पीड़िता के पिता की शिकायत भी देखी और नग्न बेटी के रस्सियों से बंधे हुए हाथ-पांव का वीडियो देखा.
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उसने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए पुलिस से आग्रह किया कि इस प्रकरण में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए, जो पुलिस ने किया भी. क्योंकि आजकल नौजवानों में रील बनाकर चर्चित होने का जोश है, उसने भी फेसबुक लाइव और रील बनाकर इस प्रकरण को उजागर किया. जो अपराध आनंद ने किया है, वह उत्तराखंड के सैकड़ों लोगों ने किया है. समाचार पत्रों ने सामूहिक बलात्कार की हेडिंग्स लगाई हैं, तो क्या हम सबको पॉक्सो एक्ट के तहत बंधित किया जाएगा? लगभग 24 घंटे से अधिक समय तक यह प्रकरण सामूहिक बलात्कार का बना रहा. यदि कूट रचना में कोई कांग्रेस का व्यक्ति सम्मिलित है, तो इसका प्रमाण सहित खुलासा किया जाना चाहिए. मैसेंजर को शूट करना सत्ता का अहंकार दर्शाता है और सत्ता एक विशुद्ध भाजपाई झगड़े में कांग्रेस को लपेटने का दुष्प्रयास कर रही है.
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