भोपाल। भोपाल नगर निगम के करोड़ों के अटल भवन में अव्यवस्था की पोल खुल गई। नवनिर्मित मुख्यालय की लिफ्ट अचानक खराब हो गई। महिला कर्मचारी आंधे घंटे तक लिफ्ट के अंदर कैद रही। ‎इस दौरान न तो कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही आपातकालीन सहायता व्यवस्था सक्रिय दिखाई दी। घटना के बाद निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन की गंभीर खामियों उजागर हुई है। वहीं इसे लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं।

‎भोपाल ‎नगर निगम के नवनिर्मित मुख्यालय की लिफ्ट अचानक बंद हो गई। निगम के नवनिर्मित मुख्यालय में एक महिला कर्मचारी लगभग आधे घंटे तक लिफ्ट में फंसी रही। कड़ी मशक्कत के बाद उसे जैसे तैसे बाहर निकाला गया। वहीं इसे लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए है। प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए नगर निगम मुख्यालय में यदि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो यह भाजपा सरकार और नगर निगम प्रशासन के तथाकथित सुशासन की वास्तविक तस्वीर है।

ये भी पढ़ें: फिर विवादों में आगर नगर पालिका: फायर स्टेशन की जमीन आवंटन पर बवाल, परिषद की मंजूरी के बाद उठे सवाल

एमपी कांग्रेस कमेटी प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे

कौन लेता जिम्मेदारी ?

धौलपुरे ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला कर्मचारी लगभग आधे घंटे तक लिफ्ट में फंसी रही। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान न तो कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही आपातकालीन सहायता व्यवस्था सक्रिय दिखाई दी। नगर निगम आयुक्त से संपर्क करने के प्रयास भी विफल रहे तथा सूचना के बावजूद फायर विभाग के अधिकारी भी समय पर मौके पर नहीं पहुंचे।

उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता और जवाबदेही के अभाव का उदाहरण है। यदि इस दौरान महिला कर्मचारी की तबीयत बिगड़ जाती या कोई गंभीर दुर्घटना हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? प्रवीण धौलपुरे ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास और आधुनिक अधोसंरचना के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों और रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। चमकदार इमारतों के पीछे अव्यवस्था और गैर-जिम्मेदारी का सच लगातार सामने आ रहा है।

ये भी पढ़ें: PWD के 9 इंजीनियर्स का कारनामा: ठेकेदारों को बचाने बना रहे थे 140 करोड़ की सड़कें, 19 सड़कों में गोलमाल का खेल, गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

कांग्रेस ने की ये मांग

उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, लिफ्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि आपातकालीन स्थिति के दौरान जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित विभाग सक्रिय क्यों नहीं हुए। धौलपुरे ने कहा कि जब नगर निगम के अपने कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तब आम जनता की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सरकारी दावे पूरी तरह खोखले साबित होते हैं। नगर निगम प्रशासन को इस घटना पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m