अनिल मालवीय, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के प्रतिष्ठित नगर सेठ परिवार का एक ऐसा ऐतिहासिक दावा सामने आया है, जिसने लंदन से लेकर दिल्ली तक के सियासी और कानूनी गलियारों में सनसनी फैला दी है। प्रथम विश्व युद्ध यानि साल 1917 के दौरान अंग्रेजों को दिए गए कर्ज को लेकर यूके सरकार का एक बेहद सकारात्मक और चौंकाने वाला जवाब आया है। 109 साल पुराने इस वार लोन के कागजात सामने आने के बाद अब ब्रिटिश हुकूमत से करोड़ों रुपये की देनदारी वापस पाने की राह आसान होती दिख रही है।
पुराने बक्सों से निकला 1917 का सस्पेंस
इस पूरे ऐतिहासिक घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब नगर सेठ परिवार में पुराने दस्तावेजों और तिजोरियों की छानबीन की जा रही थी। इसी दौरान नगर सेठ विनय रुठिया और उनके छोटे भाई विवेक रुठिया को घर में साल 1917 के ऐतिहासिक और प्रामाणिक दस्तावेज मिले।
जानकारी के मुताबिक बात 1917 की है जब दुनिया में पहला विश्व युद्ध चल रहा था और भारत पर ब्रिटिश हुकूमत का राज था। उस समय ब्रिटिश सेना में बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक मोर्चे पर डटे थे। सैनिकों के राशन-पानी, हथियार और युद्ध के विशाल खर्चों की भरपाई के लिए ब्रिटिश सरकार ने भारतीय राजा-रजवाड़ों और नगर सेठों से करोड़ों रुपये का कर्ज जुटाया था। उसी दौर में सीहोर के दानवीर नगर सेठ परिवार ने भी तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत को 35 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि वार लोन के रूप में दी थी।
लंदन भेजा गया लीगल नोटिस, डेप्ट मैनेजमेंट ऑफिस ने लिया एक्शन!
जब 1917 के यह असली वार लोन पेपर्स सामने आए तो रुठिया परिवार ने इसे हल्के में नहीं लिया और ब्रिटिश सरकार को कानूनी कटघरे में खड़ा कर दिया। नगर सेठ परिवार ने अपने अधिवक्ता श्रीयांश रानीवाल के माध्यम से यूके सरकार के डेप्ट मैनेजमेंट ऑफिस को ईमेल और स्पीड पोस्ट हार्ड कॉपी के जरिए कानूनी नोटिस भेज दिया।
नोटिस मिलते ही यूके सरकार के वित्त विभाग ने अधिवक्ता को आधिकारिक जवाब भेजा है, जिसमें ब्रिटिश सरकार ने इस 109 साल पुराने लोन को खारिज करने के बजाय बेहद सकारात्मक रुख अपनाया है।
गिल्ट रजिस्ट्रार को भेजे जाएंगे कागजात, ब्याज मिलाकर बैठेंगे करोड़ों!
यूके सरकार ने सीहोर के रुठिया परिवार से इस 35 हजार रुपये के लोन से जुड़ी और अधिक जानकारियां और मूल दस्तावेज मांगे हैं, जिन्हें ब्रिटेन के गिल्ट रजिस्ट्रार के पास जमा कराया जाना है।
1917 में 35 हजार रुपये की कीमत आज की तारीख में अरबों रुपये के बराबर मानी जा रही है। अगर ब्रिटिश सरकार कंपाउंड इंटरेस्ट के साथ यह कर्ज चुकाती है तो यह रकम करोड़ों-अरबों में पहुंचेगी।
रुठिया परिवार का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रिया के तहत मांगे गए सभी प्रमाणिक दस्तावेज जल्द ही यूके सरकार को भेजने जा रहे हैं, जिसके बाद लंदन से भुगतान का अंतिम फैसला और कानूनी रास्ता साफ होगा।
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