सोहराब आलम, मोतिहारी। DUSU छात्र संघ चुनाव में AVBP के चुनाव जीतने और NSUI का सूपड़ा साफ होने पर बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने बड़ा बयान दिया है। बलभद्र पूजा में शामिल होने के लिए मोतिहारी पहुंचे बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि राहुल गांधी 100 बार चुनाव हारकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना लिए हैं और अब अफवाह फैला कर कुछ लोगो को बरगलाने का काम कर रहे है। उनसे देश का भला नहीं होने वाला है। वे केवल बकवास करना जानते हैं। अगर देश का भला होगा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगा।
‘2025 वाला होगा प्रशांत किशोर का हश्र’
वहीं, प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज द्वारा एमएलसी-स्नातक चुनाव के लिए उम्मिदवारों का ऐलान करने और 7वां वेतन आयोग लागू करने की मांग को लेकर सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि, जिसको कुछ नहीं मिलता है। वे कुछ भी दे सकते हैं। 2025 कि चुनाव में जनता ने जो हश्र उनका किया था। वही हश्र एमएलसी चुनाव में फिर से उनका होगा।
DUSU चुनाव परिणाम पर गुरु प्रकाश का बयान
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने DUSU चुनाव परिणाम पर कहा कि, मतलब बड़े ही दोहरे मापदंड हैं। ये विरोधाभास है। एक तरफ इंदौर में आप छात्रों की गूंज कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, और दूसरी तरफ पूरे देश के छात्र जहां आते हैं, ऐसे दिल्ली विश्वविद्यालय में आपका छात्र संगठन नेस्तनाबूद हो गया, आपका अस्तित्व भी नहीं बचा। और वहां तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का नारा लगाने वाली विद्यार्थी परिषद की वहां पर जीत हुई है, विजय हुई है।
गुरु प्रकाश ने कहा कि, मुझे लगता है कि छात्रों में राहुल गांधी की जो असलियत है, जो वास्तविकता है, सभी छात्र, सभी युवा जानते हैं कि ये खोखली बातें करते हैं, कोई ठोस बात करते नहीं हैं, कोई विजन नहीं है, ये सिर्फ और सिर्फ अपनी नव-सामंती मानसिकता का प्रदर्शन करते हैं।
कांग्रेस को कोई मार नहीं सकता- पप्पू यादव
वहीं, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने DUSU चुनाव परिणाम पर कहा कि, कोई NSUI का क्लीन स्वीप नहीं हुआ, कांग्रेस को कोई डुबा नहीं सकते, कांग्रेस को कोई मार नहीं सकता। कांग्रेस की विचारधारा यह विश्व कल्याण और मानवता की विचारधारा है। कांग्रेस को खुद कांग्रेसी खत्म करते हैं। और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी में भाजपा द्वारा साम, दाम, दंड, भेद, करोड़ों-करोड़, दारू, शराब… सारी चीजें परोसी जाती हैं। हमारी भी गलतियां हैं। हम लोग राहुल गांधी के संघर्ष को देख कर काम नहीं करते हैं अपने निजी स्वार्थ को देखकर काम करते हैं।
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