प्रदीप गुप्ता, कवर्धा। जिले के वनांचल क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बोड़ला ब्लॉक के गाभोड़ा प्राथमिक शाला में पदस्थ सहायक शिक्षिका की जगह उनके पति के स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने का आरोप सामने आया है। इतना ही नहीं, शिक्षिका की अनुपस्थिति में उनके हस्ताक्षर भी पति द्वारा किए जाने का आरोप लगाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, गाभोड़ा प्राथमिक शाला में सहायक शिक्षिका संतोषी की जगह उनके पति विनोद कुमार के बच्चों को पढ़ाने का मामला लंबे समय से चर्चा में है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जर्जर भवन में पढ़ाई, नया भवन भी अधूरा
गाभोड़ा प्राथमिक शाला का स्कूल भवन भी जर्जर हालत में है। वर्ष 2020 में नए भवन के निर्माण को स्वीकृति मिलने के बावजूद भवन अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में बच्चों को पुराने और जर्जर भवन में पढ़ाई करनी पड़ रही है।

कोटनापानी स्कूल में न शिक्षक मिले, न बच्चे

इसी तरह वनांचल क्षेत्र के कोटनापानी प्राथमिक शाला की पड़ताल के दौरान स्कूल निर्धारित समय से पहले ही बंद मिला। मौके पर न तो कोई शिक्षक नजर आया और न ही बच्चे मौजूद थे। स्कूल के समय से पहले बंद मिलने की स्थिति ने विभागीय निगरानी और मैदानी स्तर पर स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

DEO की चुप्पी पर भी सवाल
पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा की ओर से मामले पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, उनकी कथित चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और स्थानीय स्तर पर संरक्षण के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी ओर, अपर कलेक्टर नरेन्द्र पैकरा ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले की जांच किस तरह करता है और गाभोड़ा व कोटनापानी के स्कूलों में सामने आई अनियमितताओं पर क्या कार्रवाई होती है।
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