दिल्ली के जनकपुरी इलाके के एक स्कूल में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के 57 वर्षीय कर्मचारी ने स्कूल परिसर के अंदर बच्ची के साथ कथित रूप से दुष्कर्म किया। घटना 1 मई की बताई जा रही है। पीड़िता की मां का आरोप है कि उनकी बेटी के साथ यह घटना स्कूल समय के दौरान स्कूल परिसर में हुई। शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। हालांकि बाद में अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी।
जनकपुरी के एक निजी स्कूल में तीन साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म का मामला 1 मई का बताया जा रहा है। परिवार के अनुसार, स्कूल से घर लौटने के बाद बच्ची ने दर्द की शिकायत की थी। बच्ची की मां ने जब उससे पूछताछ की, तो उसने कथित तौर पर बताया कि स्कूल के अंदर उसे एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहां एक कर्मचारी ने उसके साथ गलत काम किया। शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) और POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में अदालत से उसे जमानत मिल गई।
विरोध के बाद भी मिल गई जमानत
निजी स्कूल में कथित दुष्कर्म मामले में बच्ची ने आरोपी की पहचान कर ली थी। इसके बाद 1 मई को स्कूल के 57 वर्षीय कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। हालांकि बाद में द्वारका कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। बताया जा रहा है कि अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया था।इस बीच पीड़िता की मां ने आरोप लगाया है कि मामला सामने आने के बाद तुरंत उचित कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन की ओर से भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। मां ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल का एक शिक्षक भी इस मामले में शामिल हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस जांच के दौरान संबंधित शिक्षक से पूछताछ भी की गई थी।
सौरभ भारद्वाज ने जनकपुरी स्कूल दुष्कर्म मामले में आरोपी 57 वर्षीय केयरटेकर को जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि इतने गंभीर आरोपों वाले मामले में आरोपी को राहत मिलना चिंताजनक है। भारद्वाज ने पीड़िता की मां के आरोपों का समर्थन करते हुए दावा किया कि मामले में संबंधित डीसीपी ने परिवार के साथ सहयोग करने के बजाय उन्हें कथित तौर पर धमकाया। वहीं दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि बच्ची की मेडिकल जांच कराए जाने के तुरंत बाद कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई थी और आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस के मुताबिक, मामले में POCSO अधिनियम और संबंधित कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
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