कृष्ण कुमार सैनी , हिसार | चर्चित देशद्रोह मामले में जमानत पर बाहर आए संत रामपाल जी महाराज ने अब अदालत में अपनी पेशियों को लेकर नई मांग रखी है। रामपाल ने हिसार की अदालत में अर्जी दाखिल कर आगामी सुनवाईयों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी है। अदालत ने इस आवेदन पर पुलिस से 16 मई तक जवाब तलब किया है।

यह मामला 2014 में बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में हुई हिंसा और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है, जिसने पूरे हरियाणा में सनसनी फैला दी थी। उस दौरान पुलिस और प्रशासन को आश्रम के भीतर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। कार्रवाई के दौरान कई लोगों की मौत हुई थी और हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसी मामले में रामपाल और उसके समर्थकों के खिलाफ देशद्रोह समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे।

रामपाल महाराज की ओर से उनके अधिवक्ता महेंद्र सिंह नैन ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जास्मिन शर्मा की अदालत में अर्जी दाखिल की। अर्जी में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि रामपाल को अदालत में शारीरिक रूप से पेश करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी जाए। अदालत ने इस मांग पर पुलिस प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है।

गौरतलब है कि लंबे समय तक जेल में रहने के बाद हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से संत रामपाल को नियमित जमानत मिली थी। पुलिस ने संत रामपाल को 19 नवंबर 2014 को गिरफ्तार किया था। विभिन्न मामलों में पुलिस रिमांड के बाद वह 8 दिसंबर 2014 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल 2026 को उसकी नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली थी।

बताया जा रहा है कि रामपाल चार आपराधिक मामलों में जिला अदालत से बरी हो चुका है, जबकि हत्या के दो मामलों में मिली उम्रकैद की सजा पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है। अब 16 मई को होने वाली सुनवाई में अदालत पुलिस का पक्ष सुनने के बाद यह तय करेगी कि रामपाल को भविष्य की पेशियों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की अनुमति दी जाए या नहीं।