कैथल जिला न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति से 7,300 से अधिक केस सुलझाए गए। इस दौरान विभिन्न विवादों में 6.22 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का सेटलमेंट हुआ।

राकेश कथूरिया, कैथल। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कैथल की अध्यक्षा एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंचन माही के कुशल मार्गदर्शन में शनिवार को स्थानीय न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस अदालत में कुल 7 हजार 308 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। लोक अदालत के माध्यम से लोगों को अपने लंबित कानूनी विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने में बड़ी मदद मिली है।

6 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक का हुआ सेटलमेंट

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 12 हजार 789 लंबित मामले विचारार्थ रखे गए थे। इनमें से 7 हजार 308 मामलों का समाधान निकाला गया। विभिन्न श्रेणियों जैसे आपराधिक मामले, एनआई एक्ट (चेक बाउंस), बैंक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना दावा (MACT), श्रम विवाद, राजस्व और अन्य दीवानी मामलों में कुल 6 करोड़ 22 लाख 7 हजार 875 रुपये की राशि के समझौतों पर मुहर लगी। यह लोक अदालत शीघ्र, सरल और सस्ता न्याय प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम साबित हुई।

भाईचारे की भावना और कोर्ट फीस की वापसी

लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सीजेएम कंवल कुमार ने कहा कि यह एक ऐसा मंच है जहाँ किसी भी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि पक्षकारों के बीच भाईचारा मजबूत होता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में कोई न्यायालय शुल्क (Court Fee) नहीं लिया जाता और यदि किसी मामले में पहले से कोर्ट फीस जमा करवाई गई है, तो समझौता होने की स्थिति में उसे नियमानुसार वापस कर दिया जाता है। लोक अदालत के माध्यम से मामलों का तुरंत निपटारा होने से आमजन का समय और पैसा दोनों बचते हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति के साथ न्याय प्राप्त होता है।

विभिन्न बेंचों का किया गया गठन

राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए कैथल और गुहला डिवीजन में विशेष बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदिता कौशिक, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) अपर्णा भारद्वाज, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) संदीप कौर, तुषार शर्मा, और साक्षी मेंगी शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त, गुहला डिवीजन में अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) राजविंदर सिंह की बेंच ने मामलों की सुनवाई की। इन सभी न्यायिक अधिकारियों ने आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से लंबित विवादों को निपटाने में अहम भूमिका निभाई।