टिहरी विकास प्राधिकरण की आंतरिक समीक्षा में स्वीकृत मानचित्र में बदलाव, दस्तावेजों में हेराफेरी और अवैध निर्माण पर कार्रवाई न होने से जुड़े मामले सामने आए हैं. मामले में सहायक अभियंता पंकज पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.

देहरादून. टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में स्वीकृत मानचित्र में कथित बदलाव, दस्तावेजों में अनधिकृत परिवर्तन और अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई नहीं होने से जुड़े प्रकरण सामने आए हैं. विभागीय पत्र के अनुसार, इन मामलों को लेकर प्राधिकरण के सहायक अभियंता पंकज पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.

यह मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से विकास प्राधिकरणों की हालिया समीक्षा बैठक के बाद सामने आया है. 2 सितंबर 2026 को हुई समीक्षा में मुख्यमंत्री ने अवैध निर्माण के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई, ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति व्यवस्था को प्रभावी बनाने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे.

मानचित्र में बदलाव का आरोप

विभागीय नोटिस में आरोप है कि सक्षम स्तर से स्वीकृत मानचित्र में निर्धारित संशोधन प्रक्रिया का पालन किए बिना बदलाव किया गया. इसके बाद बदले हुए दस्तावेज तैयार किए जाने का भी उल्लेख किया गया है.

प्रकरण में यह भी कहा गया है कि प्राधिकरण के उपाध्यक्ष स्तर से स्वीकृत मानचित्र से अलग तरीके से एक मानचित्र अपलोड किया गया. इसमें बेसमेंट और स्टिल्ट पार्किंग को ऐसे स्वरूप में दर्शाए जाने की बात कही गई है, जिसे प्राधिकरण के नियमों के अनुरूप नहीं माना गया.

सहायक अभियंता से जवाब तलब

नोटिस के जरिए सहायक अभियंता पंकज पाठक से मानचित्र में हुए बदलाव और दस्तावेजों में परिवर्तन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है. विभागीय स्तर पर इस बात की भी पड़ताल का रास्ता खुला है कि स्वीकृत मानचित्र में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत हुआ.

मामले में दस्तावेजों में बदलाव की प्रक्रिया के साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आने की बात कही गई है.

अवैध निर्माण पर भी सवाल

आंतरिक समीक्षा में कुछ ऐसे निर्माण कार्यों से जुड़े मामले भी सामने आए हैं, जिन्हें नियमों के विपरीत मानते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए थे. आरोप है कि नोटिस जारी होने के बाद भी आगे की कार्रवाई नहीं हुई और कुछ मामलों में निर्माण कार्य जारी रहने दिया गया.

इससे प्राधिकरण की उस प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं, जिसके तहत किसी निर्माण की निगरानी, नियमों के उल्लंघन की पहचान, नोटिस जारी करने और उसके बाद कार्रवाई की जाती है.

पुराने मामलों की भी समीक्षा

विभागीय समीक्षा में पूर्व में सामने आए मामलों की कार्रवाई की स्थिति भी देखी जा रही है. इसमें यह जांचने की बात है कि पहले सामने आई अनियमितताओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हुई या नहीं और पूरी प्रक्रिया में किन स्तरों पर जिम्मेदारी थी.

यानी जांच का दायरा केवल दस्तावेजों में बदलाव तक सीमित नहीं है. नोटिस जारी होने के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और संबंधित मामलों में जिम्मेदारी किसकी थी, यह पहलू भी समीक्षा में शामिल है.

धामी की समीक्षा के बाद सख्ती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास प्राधिकरणों की 2 सितंबर की समीक्षा बैठक में अवैध निर्माण की शुरुआती स्तर पर पहचान के लिए GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी जैसी तकनीकों के इस्तेमाल के निर्देश दिए थे. उन्होंने विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया था.

फिलहाल सहायक अभियंता पंकज पाठक से कारण बताओ नोटिस के माध्यम से उनका पक्ष मांगा गया है. उनके जवाब के बाद ही मानचित्र में बदलाव और दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट होगी, जबकि अवैध निर्माण के मामलों में नोटिस के बाद कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है.